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प्रावेटाइजेशन के बाद मिली खुशखबरी, जीआइएफ में हैंड ग्रेनेड बॉडी का उत्पादन फिर शुरू

प्रावेटाइजेशन के बाद मिली खुशखबरी, जीआइएफ में हैंड ग्रेनेड बॉडी का उत्पादन फिर शुरू

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gray iron foundry

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जबलपुर। लंबे समय से काम के अभाव में सुस्त पड़ी ग्रे आयरन फाउंड्री (जीआइएफ) में दिवाली खुशियां लेकर आई है। प्राइवेटाइजेशन के बाद यहां काम एक बार फिर से शुरू हो गया है। जानकारी के अनुसार लम्बे समय बाद हैंड ग्रेनेड की बॉडी की ढलाई का काम फिर से शुरू किया है। हाई एक्प्लोसिव फैक्ट्री खडक़ी में इसकी आपूर्ति शुरू हो गई है। वहां से इस बम की बॉडी की संतोषजनक रिपोर्ट मिलने से फांउड्री में वर्कलोड की कमी दूर होगी। 155 एमएम 45 कैलीबर धनुष तोप में लगने वाले नौ प्रकार के कलपुर्जों की ढलाई का काम भी निर्माणी ने किया है। फाउंड्री के महाप्रबंधक अजय सिंह ने बताया कि समय के साथ अंतराष्ट्रीय रक्षा क्षेत्र में हो रहे बदलावों के मद्देनजर एकल उत्पाद से निकलकर निर्माणी ने उत्पाद विविधिकरण को अपनाते हुए कास्टिंग्स के अतिरिक्त, एम्युनिशन बॉक्स, हैंड ग्रेनेड, माइन प्रोटेक्टिव व्हीकल का हल, 100-120 किलोग्राम एरियल बम की बॉडी का उत्पादन सफ लतापूर्वक किया है।

महाप्रबंधक का कहना था कि निर्माणी के कुशल कामगार किसी भी चुनौती के लिए सजग व सक्षम है। उपलब्ध संसाधनों से निर्माणी में गन शॉप का निर्माण किया गया जहां 130 एमएम गन का उन्नयन का कार्य होना था। कर्मचारियों को इस नए कार्य से परिचित कराया कराया गया। सभी के कठिन परिश्रम से 130 एमएम गन को 155 एमएम 45 कैलीबर में उन्नयन किया गया। भविष्य में भी उत्पादों की भिन्नता और परिमाण इस निर्माणी को उच्चतर स्तर पर ले जाएगा।

गुप्ता होंगे जीसीएफ के नए जीएम
नवगठित रक्षा कंपनियों ने आयुध निर्माणियों में महाप्रबंधक की नियुक्तियों के आदेश जारी करना शुरू कर दिए हैं। गन कैरिज फैक्ट्री के लिए एडवान्स्ड वेपंस एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (एडब्ल्यूइआइएल) प्रबंधन ने दीपक गुप्ता को नया महाप्रबंधक बनाया है। वे इससे पहले भी फैक्ट्री में पदस्थ रह चुके हैं। सात रक्षा कंपनियों में सीएमडी बनाए गए थे। इनमें से दो सीएमडी जबलपुर की आयुध निर्माणियों से नियुक्त किए गए। इनमें एक गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) से तो दूसरे आयुध निर्माणी खमरिया (ओएफके) से थे। इसी प्रकार वीकल फैक्ट्री के महाप्रबंधक को निगम में डायरेक्टर बनाया गया था।