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शनि दोष तत्काल दूर करते हैं ये हनुमान, पैरों में दबा रखे हैं शनिदेव – देखें वीडियो

खारीघाट स्थित हनुमानगढ़ी में शनिवार मंगलवार को लगता है भक्तों का मेला, शनि दोष से पीडि़तों को यहां मिलती है मुक्ति  
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जबलपुर

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Lalit Kumar Kosta

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Updated: 30 Mar 2018, 11:26 AM IST

hanuman aur shani dev ki kahani hindi me

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जबलपुर। रामचरित मानस या फिर रामायण में लंका कांड में वर्णित है कि जब सीता माता की खोज करने हनुमानजी लंका गए थे, तब उन्होंने रावण द्वारा बंधक बनाए गए शनिदेव को भी मुक्त कराया था। इसके बाद शनि देव ने उन्हें वचन दिया कि जो कोई हनुमान जी की पूजा वंदना करेगा, वे उसे अपने प्रकोप या दोष से मुक्त कर देंगे। इस बात का जीवंत प्रमाण नर्मदा तट ग्वारीघाट स्थित हनुमानगढ़ी में विराजमान रामभक्त हनुमान की प्रतिमा है। जो अपने पैरों के नीचे शनिदेव को दबाए हुए हैं। इतिहासकारों की बात मानें तो यह प्रतिमा करीब 600 साल पुरानी है। इस मंदिर के बारे में यह भी कहा जाता है कि किसी ज्योतिष से कम नहीं है, केवल यहां आने से लोगों के दोष समाप्त हो जाते हैं और उनकी कुंडली में ग्रहों का अनुकूल प्रभाव होने लगता है।


प्रतिमा में नजर आते हैं हनुमानजी के भीगे हुए बाल
यूं तो पवनपुत्र हनुमानजी के अनेक प्रतिष्ठित व प्राचीन मंदिर हैं, लेकिन जबलपुर खारीघाट स्थित प्रतिमा इनमें खास पहचान रखती है। प्रतिमा छह सदी से भी अधिक पुरानी है। प्रतिमा पर कटावदार रोएं बने हुए जों पवनपुत्र के भीगे हुए बालों को दशाते हैं। प्रतिमा में अंजनी नंदन शनि देव को पैरों के नीचे दबाए हुए हैं। प्रतिमा बिल्कुल जीवंत प्रतीत होती है। अखंड रामायण पाठ के दौरान मंदिर स्थल का वातावरण बिल्कुल बदल जाता है।


स्नान कर रोज करने आते हैं फेरा
मंदिर समिति के ओंकार दुबे के अनुसार ऐसी मान्यता है कि इस दौरान वीर हनुमान स्वयं मंदिर स्थल पर फेरा लगाने के लिए आते हैं। खारीघाट पर पीपल के वृक्ष के नीचे आकर खड़े हो गए। प्रतिमा की जीवंतता अब भी लोगों के अविश्वास को विश्वास में बदल देती है। नर्मदा तीर्थ ग्वारीघाट के समीप खारीघाट में हनुमानजी की प्रतिमा पर बालों के रोएं अब भी ऐसे दिखते हैं मानों वे नर्मदा में नहाकर निकले हों। मान्यता है कि प्रतिमा स्थल पर अब भी हनुमानजी फेरा लगाने आते हैं।