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एमपी में पैरासिटामोल सिरप पर स्वास्थ्य विभाग ने लगाई रोक, सरकारी अस्पतालों में हुई थी सप्लाई

Paracetamol Syrup Ban: मध्य प्रदेश के जबलपुर से सरकारी अस्पतालों में सप्लाई किए गए पैरासिटोमोल सिरप के यूज पर बैन, जांच में फेल हुए सैंपल तो स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए निर्देश

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Paracetamol Syrup sample failed

Paracetamol Syrup sample failed (photo:patrika creative)

Paracetamol Syrup Ban: मध्यप्रदेश में दवा की गुणवत्ता एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। जबलपुर में पैरासिटामोल सिरप के सैंपल जांच में फेल पाए गए हैं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत एक्शन लेते हुए इसके एक बैच पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी है।

दरअसल, यहां सरकारी अस्पतालों में बैच नंबर 41507 नंबर की पैरासिटामोल दवा (Paracetamol Syrup) की सप्लाई की गई थी। लेकिन सैंपल फेल होने के बाद इस बैच के सिरप के यूज पर तुरंत रोक लगा दी गई है। हालांकि अब सवाल ये है कि स्वास्थ्य विभाग इतनी देर में क्यों जागा?

सीएमएचओ ने जारी किए निर्देश

जबलपुर के इस मामले की जानकारी मिलते ही जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी(CMHO) ने सभी सरकारी अस्पतालों जहां पैरासिटामोल का यह बैच पहुंचा को निर्देश जारी करते हुए इस बैच के उपयोग पर तुरंत रोक लगाने और उपलब्ध स्टॉक को अलग रखने को कहा है। साथ ही संबंधित दवा की जांच रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि आखिर सिरप का उपयोग किया गया है या नहीं?

पहले भी सामने आ चुके हैं ये मामले

पैरासिटामोल सिरप के जांच में फेल होने का यह पहला मामला नहीं है कि मध्य प्रदेश में इसके सैंपल फेल हुए हैं। इससे पहले भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में इस सिरप के साथ ही अन्य सिरप और अन्य दवाओं के सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल पाए जा चुके हैं। बार-बार सामने आने वाले इन मामलों से यह संकेत मिलता है कि दवा सप्लाई और गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया में कहीं न कहीं कोई चूक जरूर हो रही है।

सप्लाई से पहले नहीं होती गुणवत्ता की जांच!

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब दवाएं सरकारी अस्पतालों में पहुंचने से पहले दवा गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया से गुजरती हैं, तो फिर फेल सैंपल (Paracetamol Syrup) बाजार या अस्पताल तक कैसे पहुंच जाते हैं। क्या सप्लाई से पहले जांच की प्रक्रिया केवल कागजी बनकर रह गई है या फिर जांच प्रक्रिया में कोई खामी है, जो ये सप्लाई से पहले सामने नहीं आ पा रहा कि दवा की गुणवत्ता कैसी है?

ऐसी दवाएं कितनी गंभीर, छिंदवाड़ा में कफ सिरप से बच्चों की मौतें कोई नहीं भूला

हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह की लापरवाही तो सीधे तौर पर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है। खासकर सिरप जैसी दवाएं जो अक्सर बच्चों और बुजुर्गों के इलाज में सबसे ज्यादा काम आती हैं। ऐसे में ये दवाएं गंभीर परिणाम दे सकती हैं। छिंदवाड़ा में जहरीला कफ सिरप पीने से बच्चों की किडनी फेल होने और मौत के मामलों को लोग अब तक नहीं भूले हैं। ऐसे में यह मामला स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही उजागर करता है।

बता दें कि पैरासिटामोल दवा बुखार और हाथ पैरों में होने वाले दर्द निवारण के काम आती है। एमपी में कई बार इसके सैंपल फेल हो चुके हैं। ये दवा बच्चों और बुजुर्गों को भी दी जाती है।