
CAT Jabalpur Paves the Way for Three Officers to Join the IPS Cadre - demo pic
IPS- मध्यप्रदेश में राज्य पुलिस सेवा (एसपीएस) के अनेक अधिकारी, भारतीय पुलिस सेवा यानि आईपीएस केडर के लिए दशकों से इंतजार कर रहे हैं। हाल ये हैं कि प्रदेश में 1997 बैच के एसपीएस अधिकारी भी इससे वंचित हैं जबकि अन्य राज्यों छत्तीसगढ़ में 2002 बैच के और कर्नाटक में 2012 बैच के राज्य अधिकारियों को आईपीएस कैडर दिया जा चुका है। प्रदेश में कैडर रिव्यू में विलंब के कारण यह स्थिति बनी है। कुछ अधिकारी से तय आयु सीमा ही पार कर चुके हैं। निराशा की ऐसी स्थिति में एक खुशखबरी सामने आई है। एमपी के तीन अधिकारियों को अब बड़ा दायित्व मिल सकेगा। राज्य पुलिस सेवा के इन अफसरों को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण यानि कैट ने बड़ी राहत देते हुए आइपीएस केडर के लिए राह प्रशस्त की है। कैट की जबलपुर खंडपीठ ने राज्य पुलिस के तीनों अधिकारियों के हक में राहतकारी अंतरिम आदेश पारित किया है।
जबलपुर में पदस्थ एडिशनल एसपी जितेंद्र सिंह के अलावा सत्येंद्र सिंह तोमर व महेश कुमार वैश्य की याचिका पर
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने अहम आदेश पारित किया है। कोर्ट ने इन अधिकारियों के भारतीय पुलिस सेवा, आइपीएस केडर में शामिल करने के दावे पर विचार करने के निर्देश दिए गए हैं। इस बीच यथास्थिति बकरार रखने की व्यवस्था दी गई है। केंद्र व राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया।
याचिकाकर्ताओं एडिशनल एसपी जितेंद्र सिंह के अलावा सत्येंद्र सिंह तोमर व महेश कुमार वैश्य ने कोर्ट को बताया कि वे 1998 बैच के राज्य पुलिस अधिकारी हैं। उन्हें 56 वर्ष की आयुसीमा पार करने के कारण आइपीएस के दावे से बाहर किया जा रहा है।
दरअसल, ओवरएज होने की वजह याचिकाकर्ता नहीं हैं बल्कि केंद्र व राज्य ने प्रत्येक पांच वर्ष में किए जाने वाले अनिवार्य कैडर रिव्यू में विलंब किया है। इस विलंब के कारण आवेदक नियत आयु सीमा से पार हो गए। इसपर मध्यप्रदेश के राज्य पुलिस सेवा के इन अफसरों को आइपीएस केडर पर कैट ने सरकार से जवाब मांगा।
नियमानुसार आईपीएस कैडर की समीक्षा हर पांच साल में होनी चाहिए, लेकिन मध्यप्रदेश में ऐसा नहीं हुआ। राज्य में पिछले 23 वर्षों में यह केवल तीन बार ही की गई है। पुलिस उप अधीक्षक यानि डीएसपी 8 साल की सेवा अवधि पर आईपीएस कैडर के पात्र हो जाते हैं पर प्रदेश के कई अधिकारी 28 साल की सेवा पूरी करने के बाद भी आईपीएस कैडर का इंतजार कर रहे हैं।
Updated on:
23 Apr 2026 11:11 am
Published on:
23 Apr 2026 11:08 am
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