
guest teachers jbp highcourt
मध्यप्रदेश में टीचर्स को वेतन और अन्य सेवाओं को लेकर कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश में शिक्षकों के अलग अलग वर्गों की अलग अलग समस्याएं सामने आ रहीं हैं। इनमें सबसे ज्यादा परेशानी गेस्ट टीचर्स यानि अतिथि शिक्षकों guest teachers को आ रही है। गेस्ट टीचर्स guest teachers को न केवल नियुक्तियों में अनेक झंझटों का सामना करना पड़ता है बल्कि उन्हें मानदेय में भुगतान को लेकर भी परेशान होना पड़ता है। अब प्रदेश के हाईकोर्ट ने इन टीचर्स के हित में बड़ा फैसला सुनाया है। गेस्ट टीचर्स guest teachers के मानदेय और नियुक्ति के संबंध में जारी किए गए हाईकोर्ट के आदेश में पालन के लिए समय सीमा भी तय कर दी गई है।
मध्यप्रदेश हाइकोर्ट जबलपुर ने गेस्ट टीचर्स के संबंध में अहम फैसला देते हुए पूर्व अतिथि शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। पूर्व गेस्ट टीचर्स की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उनकी फिर से नियुक्ति के आदेश दिए। उन्हें बकाया मानदेय का भुगतान भी ब्याज सहित करने को कहा। प्रदेशभर में गेस्ट टीचर्स के पक्ष में इसे कोर्ट का बड़ा आदेश बताया जा रहा है।
पूर्व गेस्ट टीचर्स अजय ठाकुर, आशीष कुमार, पंकज साहू, उदयभान लोधी, नीरज अहिरवार, मुकेश अहिरवार, प्रसन्न कुर्मी, हरविंद सिंह द्वारा 15 सितम्बर 2024 को हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि हम सभी गेस्ट टीचर के रूप में काम कर रहे थे। सभी ने फरवरी 2024 तक स्कूलों में अध्यापन कार्य भी किया. लेकिन अक्टूबर 2023 से ही वेतन देना बंद कर दिया गया। याचिका में पुन: नियुक्त करने और लंबित वेतन ब्याज सहित दिलाने की मांग की गई थी।
याचिका में प्रदेश सरकार, संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी, बीईओ आदि को पार्टी बनाया गया था। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जिम्मेदार अफसरों को सभी पूर्व गेस्ट टीचर्स के संबंध में 45 दिन में निर्णय लेने का आदेश दिया। हाइकोर्ट ने 24 अक्टूबर 2024 को अनावेदकों को यह आदेश जारी किया। कोर्ट के आदेश की प्रति प्राप्त होने के बाद सभी पूर्व गेस्ट टीचर्स ने संबंधित कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी और बीईओ को आदेश के मुताबिक निर्णय लेने के लिए आवेदन दे दिया है।
याचिकार्ताओं ने बीते सत्र में स्टूडेंट को स्कूलों में जाकर पढ़ाया लेकिन उन्हें 5 महीने का मानदेय ही नहीं दिया गया। पूर्व गेस्ट टीचर्स के अनुसार, स्कूलों के उपस्थिति रजिस्टर में उनके बाकायदा हस्ताक्षर भी हैं तब भी उन्हें वेतन से वंचित कर दिया गया।
Published on:
11 Nov 2024 03:17 pm
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