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खुदाई में ऐतिहासिक खजाना मिला, अरबों रुपए कीमत की पंचमुखी महादेव समेत विष्णु दशावतार प्रतिमाएं शामिल

खुदाई में ऐतिहासिक खजाना मिला, अरबों रुपए कीमत की पंचमुखी महादेव समेत विष्णु दशावतार प्रतिमाएं शामिल

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खुदाई में ऐतिहासिक खजाना मिला, अरबों रुपए कीमत की पंचमुखी महादेव समेत विष्णु दशावतार प्रतिमाएं शामिल

कटनी. जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर पुष्पावती नगरी बिलहरी में सोमवार की शाम नदी में पुल निर्माण की खुदाई के दौरान 11वीं सदी की अनूठी प्रतिमाएं निकली हैं। मूर्तियों को देखने के बाद खुदाई कर रहे मजदूरों ने आनन-फानन में खुदाई रोककर प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दी। खुदाई में निकली प्रतिमाओं में दुर्लभ पंचमुखी शिव प्रतिमा, विष्णु भगवान के कई स्वरूपों वाली प्रतिमा सहित दो अन्य देवी-देवताओं सहित 10 छोटी मूर्तियां हैं। मूर्तियों में अद्भुत नक्काशी है। पुरातत्व विभाग के मल्टी टॉस्क सर्विस बिलहरी प्रदीप जैन के अनुसार मूर्तियां नीले रंग के पत्थर की बनी हुई हैं।

नदी की तलहटी की खुदाई में निकलीं कलचुरीकाल की प्रतिमाएं
पंचमुखी भगवान शिव, विष्णु व देवियों की हैं प्रतिमाएं,
10 छोटी प्रतिमाएं भी मिलीं, चौकी में कराया गया सुरक्षित

प्रधानमंत्री सडक़ योजना में बन रहा है पुल :
नायब तहसीलदार बिलहरी प्रियंका नेताम ने बताया कि संगम नदी घाट स्लीमनाबाद रोड पर प्रधानमंत्री सडक़ योजना के तहत पुल का निर्माण चल रहा है। पुल निर्माण के लिए सोमवार की शाम खुदाई की जा रही थी। इसी दौरान एक के बाद एक चार मूर्तियां निकलीं। निर्माण एजेंसी ने तत्काल पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दी। रात भर मौके पर मूर्तियों की सुरक्षा की गई। मंगलवार को नायब तहसीलदार प्रियंका नेताम, आरआइ संतोष श्रीवास्तव, पटवारी आनंद पांडेय, बिलहरी चौकी पीएसआइ राहुल परमार, एसआइ रमेश कौरव, सरपंच गौरीशंकर गोस्वामी आदि मौके पर पहुंचे। मूर्तियों को साफ कराते हुए बिलहरी पुलिस चौकी में सुरक्षित रखवाया गया है।

सदाशिव व भगवान विष्णु के दस अवतारों की हैं प्रतिमा
पुरातत्व विभाग जबलपुर के डिप्टी डायरेक्टर पीसी श्रीवास्तव के अनुसार बिलहरी में निकली प्रतिमाएं सदाशिव, भगवान विष्णु के 10 अवतारों, उनके परिकर, भगवान सूर्य सहित अन्य देवी-देवताओं की कलचुरी काल की हैं। ये 10वीं व 11वीं शताब्दी के आसपास की हैं। कीमत की गणना कराई जाएगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऐसी प्रतिमाओं की कीमत करोड़ों रुपये होती है।

बिलहरी का कलचुरी कालीन इतिहास
बिलहरी का इतिहास कलचुरी काल से जुड़ा हुआ है। इसका इतिहास में पुष्पावती नगरी के नाम से उल्लेख मिलता है, जिसकी स्थापना अंगराज कर्ण ने की थी। यहां कल्चुरी, चेरी राजाओं और बाद में चंदेल व गौंड राजाओं ने शासन किया। बिलहरी नगर पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित किया गया है। यहां तपसीमठ, विष्णुवाराह मंदिर, 13 बावली, 85 शिवालय, गयाकुंड, नौ देवियों के मंदिर, कामकंदला आदि बने हुए हैं।

बिलहरी में 11वीं सदी की मूर्तियां निकलने की जानकारी मिली है। इस संबंध में पुरातत्व विभाग से संपर्क कर उन्हें संरक्षित कराने पहल की जाएगी।
- शशिभूषण सिंह, कलेक्टर