
Holi 2022: इस बार दो नहीं तीन दिन मनाई जाएगी होली, जानिए Holika Dahan का शुभ मुहूर्त और महत्व
जबलपुर। होली का पर्व शहर में अलग-अलग अंदाज में मनाया जाता है। यहां विभिन्न प्रदेशों के लोग बडी संख्या में रहते हैं, इसलिए रीति-रिवाज थोड़े भिन्न हैं। लेकिन, लाल-पीले, हरे-नीले रंगों व गुलाल की खूबसूरती में सभी एकता के रंग में सराबोर नजर आते हैं। यहां पंजाबी लोग धूमधाम से होला मोहल्ला मनाते हैं, तो बंगभाषियों की होली का अलग अंदाज है। शहर की बुंदेलखंडी होली का सुरूर पांच दिन तक सिर चढकऱ बोलता है। दक्षिण भारतीय व मराठी संस्कृति की होली के रंग भी खूब बिखरते हैं।
पांच दिन सिर चढकऱ बोलता है बुंदेलखंडी होली का सुरूर
संस्कारधानी में होली के विविध रंग, दिखेगी कई संस्कृतियों की झलक
शहर में गुजराती भी रहते हैं, मराठी भी। पंजाबी, राजस्थानी, साउथ इंडियन सभी समाज के लोग साथ में रहने से सारी परम्पराएं व रीति-रिवाज मिक्सअप हो गए हैं। नितिन भाटिया बताते हैं कि पंजाबी समाज में खास तौर पर होली का ऐसा कोई रिवाज नहीं है। सिख लोग होला मोहल्ला मनाते हैं, गुरुद्वारे जाते हैं और लंगर वितरित करते हैं। लेकिन, मोना पंजाबी में ऐसी परम्परा नहीं है। लेनिक, अब सभी के घर पर गुझिया व अन्य पकवान बनते हैं। एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दी जाती हैं। ग्वारीघाट गुरुद्वारे में होला मोहल्ला पर आयोजन किया जाता है। बेदीनगर गुरुद्वारे में बेदी सम्प्रदाय के लोग दूर-दूर से आकर पांच दिनों तक होली मनाते हैं। इस दौरान यहां मेला सा लगता है।
बंग भाषी खेलेंगे दोले
बंगाली समाज में होली खेलने को दोले खेलना कहते हैं। होली जलाने की परम्परा है, लेकिन उसे होलिका दहन न कहकर नाड़ापोडा कहा जाता है। अंकित बैनर्जी ने बताया कि होली पर होलिका न जलाकर धान की फसल कटने के बाद जो कचरा होता है उसे जलाया जाता है। इसके साथ आसपास का दूसरा कचरा भी जला देते हैं। इससे स्वच्छता का संदेश दिया जाता है।
मराठी समाज में बनेगी पूरन पोली
मराठी समाज में होली पर पूरन पोई विशेषकर बनती है। अरुण सातपुते ने बताया कि हमारे समाज में कहते भी हैं कि होली रे होल, पूरन की पोली। इसके साथ ही सामान्य पूजन होता है। इसी तरह मारवाड़ी समाज में होली के दिन दलिया और गुड़ की लपसी के साथ दाल-बाटी और चूरमा बनाया जाता है।
टेसू के फूल, आम की पत्ती से रंग
बुजुर्गों का कहना है कि रंग बनाने के लिए कई दिन पहले आम की नई कोपलों और हरी पत्तियों को कुंडों में भरकर रखा जाता था ताकि उनका रंग पानी में घुल जाए। बाद में पत्तियों को पानी में उबाला जाता था, जिससे गाढ़ा हरा रंग बनता था। टेसू के अलावा अन्य रंग बिरंगे फूलों से प्राकृतिक रंगों को तैयार किया जाता था। हर मोहल्ले में होलिका रखी जाती थी।
अरंडी के नीचे होलिका दहन
शहर के गली-मोहल्लों, कॉलोनियों में जगह-जगह अरंडी को पेड़ की डगाल के रूप में होली के खम्भ गड़ाए गए हैं। स्थानीय परम्परा है कि अरंडी के पेड़ के नीचे होलिका और प्रहृलाद की प्रतिमा रखकर होलिका दहन होता है।
मांगते थे लकडिय़ां और कंडे
80 वर्ष के शीतल चन्द्र अग्रवाल बताते हैं कि पुराने दिनों में मढ़ाताल में चारों तरफ लोगों के घर थे और बीच के मैदान में चूने का घेरा बनाकर होलिका रखी जाती थी। होलिका दहन के लिए बच्चे घर-घर जाकर लकडयि़ां और कंडे मांगते थे और लोग खुशी-खुशी लकडयि़ां और कंडे देते थे। हर किसी को अगले दिन धुरेड़ी पर रंग-गुलाल खेलने का जुनून होता था।
दुख-दर्द में होते हैं शामिल
होली का पर्व एक दूसरे के दुख परेशानी में शामिल होने का संदेश देता है। शहर में रिवाज है कि आसपास जिसके भी घर में किसी की मृत्यु हुई होती है उसके यहां मिलने जरूर जाते हैं। ऐसा करके सामाजिक एकता का संदेश दिया जाता है। जिसके घर में इस तरह की परेशानी है वहां जाकर बताया जाता है कि उनके दुख के सभी शामिल हैं वो लोग अकेले नई हैं।
रसरंग बारात ने सुधारा माहौल
80 के दशक में होली का स्वरूप विकृत होने से लोगों ने घर से निकलना बंद कर दिया था। ऐसे माहौल को सुधारने के लिए गुंजन कला सदन संस्था द्वारा होली पर रसरंग बरात निकालने की शुरुआत की गई। इस रसरंग बरात के पीछे उद्देश्य था कि एक पारंपरिक, पारिवारिक व सामाजिक माहौल में शहर के लोग मिलकर होली मना सकें। सबसे पहले रसरंग बारात का आयोजन वर्ष 1990-91 में किया गया। इसमें शहर के सभी वर्गों से राजनेताओं, समाजसेवी, व्यापारियों, कवियों, कलाकारों, पत्रकारों, साहित्यकारों के साथ-साथ अन्य सभी को भी शामिल किया गया। रसरंग बरात को घोड़े, दुलदुल घोड़ी के साथ-साथ गधों पर भी निकाला गया। बारात में बैलगाडिय़ों में गुलाल भर कर रास्ते भर गुलाल उड़ाते हुए निकला जाता था। रसरंग बारात ने शहर पर होली के माहौल को बेहतर करने में बड़ी भूमिका निभाई। बाद में भीड़ को देखते हुए रसरंग बारात को रसरंग महोत्सव में बदल दिया गया।
Published on:
16 Mar 2022 03:15 pm
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