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जबलपुर.
मप्र हाईकोर्ट में होमगार्ड जवानों को साल में दो महीने काम से बिठाने के नियम व इस सम्बंध मंें होमगार्ड मुख्यालय के आदेश क ी संवैधानिकता को चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया कि उक्त नियम व आदेश संविधान के तहत दिए गए मूल अधिकारों का उल्लंघन हैं। चीफ जस्टिस एके मित्तल व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार, होमगार्ड महानिदेशक, होमगार्ड सेंटर स्टाफ जबलपुर व होमगार्ड जिला कमांडेंट नरसिंहपुर को नोटिस जारी कर मामले पर एक अप्रैल तक जवाब-तलब किया।
नरसिंहपुर जिले में कार्यरत होमगार्ड के जवानों अमरेश पाठक, योगेश गुप्ता सहित छह की ओर से याचिका दायर कर कहा गया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति तीन साल के लिए संविदा पर की गई। लेकिन, २२ जनवरी को होमगार्ड मुख्यालय ने एक आदेश जारी कर होमगार्ड महानिदेशक ने याचिकाकर्ताओं को साल में दो माह के लिए नौकरी से कॉल ऑफ (बैठने) को कह दिया। उन्हें ड्यूटी किट जमा करने के निर्देश दिए गए। मप्र होमगार्ड नियम २०१६ के नियम २७(सी ) के तहत उन्हें एक फरवरी से दो माह ड्यूटी पर न आने को कहा गया। अधिवक्ता विकास महावर ने तर्क दिया कि मप्र हाईकोर्ट के २०११ में दिए एक आदेश के मुताबिक होमगार्ड के जवान की सेवाएं साल में दो माह के लिए कॉल ऑफ नहीं की जानी चाहिए। सुको ने भी इसकी पुष्टि की। यह नियम व २२ जनवरी का आदेश संविधान के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हैं। तर्कों से सहमत होकर कोर्ट ने अनावेदकों को नोटिस जारी किए।
Published on:
07 Feb 2020 09:42 pm
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