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बचपन से ही क्रूर होते हैं ऐसे लोग, थोड़ा भी असहज लगे व्यवहार तो इनसे दूर हो जाएं

दोहरे व्यक्तित्व के होते हैं मनोरोगी, बचपन से आ जाती है क्रूरता, मनोरोगियों को समझना होता है मुश्किल...>

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जबलपुर। दिल्ली में श्रद्धा के शरीर के कई टुकड़े करके फ्रिज में रखने वाले आफताब और जबलपुर के मेखला रिसॉर्ट में हुई युवती की हत्या और संजीवनगर में महिलाओं को मुक्का मारने जैसे यह मामले क्रूरता हैं। शहर में ऐसे कई लोग घूम रहे हैं जो साइकोपैथ (मनोरोगी) हैं, जिनकी पहचान करना भी जरूरी है।

हमारे आसपास, पड़ोस में, स्कूल-कॉलेज या अन्य संस्थानों में भी ऐसे कई मनोरोगी हो सकते हैं। इसलिए इनसे दूरी बनाना आवश्यक है। क्योंकि ये अपने थोड़ी देर के गुस्से या स्वयं को सही साबित करने के मकसद से किसी को भी हानि पहुंचा सकते हैं। ये देखने में तो सामान्य नजर आते हैं, लेकिन होते नहीं हैं। इसलिए किसी से दोस्ती करने से पहले उसकी हिस्ट्री जांच लें। यदि कोई रिश्ता शुरू कर रहे हैं तो परिवार, दोस्तों और करीबियों को इसकी जानकारी दें। यदि रिश्ते में थोड़ा-सा भी असहज महसूस करें तो उससे दूरी बना लें।

ऐसे जन्म लेती है प्रवृत्ति

● बचपन से ही रहते हैं सबसे अलग
● एंटीसोशल पर्सनैलिटी के होते हैं
● बच्चों से मारपीट करते हैं, खिलौने तोड़ देते हैं।
● किशोर अवस्था से ही नशा करने लगते हैं

ऐसे कर सकते हैं पहचान

● बार-बार बातें बदलने वाले पर भरोसा न करें
● किसी से दोस्ती करने के पूर्व हिस्ट्री पता करें
● वह किसी भी बात पर क्रूर हो सकता है, मामला पलटता देख शांत हो जाता है।
● खुद को सामान्य दिखाने का करते हैं दिखावा
● सोशल मीडिया पर रहते हैं एक्टिव

साइकोपैथ डबल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर से ग्रसित होते हैं। इनमें बचपन से ही क्रूरता आ जाती है। झूठ बोलना, नशा करना और दूसरे बच्चों को मारना शुरू कर देते हैं। ये किसी से दोस्ती करने से पहले उसकी कमजोरी जान लेते हैं। उसे खुद पर इमोशनली डिपेंड कर लेते हैं, ताकि सामने वाला उनके बिना रह न पाए। यही कारण है कि साइकोपैथ की हर गलती को सामने वाला माफ कर देता है। वे इमोशनल ब्लैकमेल करने में भी माहिर होते हैं। उनकी किसी भी गलती को माफ न करें। यदि वे हावी होने का प्रयास करते हैं तो परिजनों, दोस्तों और पुलिस की सहायता लें।

डॉ. रत्ना जौहरी, मनोवैज्ञानिक

लोग कई तरह की मानसिक बीमारियों से ग्रसित होते है। कई बार अपराधी गंभीर वारदातों को अंजाम देने के बाद तरह-तरह की घटनाएं करते हैं, जिससे वे खुद को मानसिक बीमार साबित कर फायदा ले सकें। सबसे पहले परिजनों की जिम्मेदारी है कि यदि उनके बच्चे या करीबी में उन्हें दो पर्सनैलिटी नजर आए, तो वे उसे मनोवैज्ञानिक के पास ले जाकर इलाज कराएं। यह सामान्य बीमारी है जो काउंसलिंग और दवाओं से ठीक हो सकती है।

-संजय अग्रवाल, एएसपी