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कैंसर अवेयरनेस डे: पेस्टीसाइड से बढ़ा खतरा, बच्चों की संख्या ज्यादा

मेडिकल के कैंसर हॉस्पिटल में इस वर्ष अब तक पहुंचे 2500 से ज्यादा रोगियों में तम्बाकू व इससे युक्त पदार्थों के सेवन की वजह से कैंसर के लक्षण मिले हैं। दूसरे नम्बर पर खाद्य पदार्थों में कीटनाशकों का इस्तेमाल सामने आया है।

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reetesh pyasi

Nov 07, 2016

cancer detection within 30 minutes

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जबलपुर। फल व सब्जियों को लम्बे समय तक सुरक्षित रखने में इस्तेमाल किए जा रहे पेस्टीसाइड से कैंसर का खतरा बढ़ रहा है। मेडिकल के कैंसर हॉस्पिटल में इस वर्ष अब तक पहुंचे 2500 से ज्यादा रोगियों में तम्बाकू व इससे युक्त पदार्थों के सेवन की वजह से कैंसर के लक्षण मिले हैं। दूसरे नम्बर पर खाद्य पदार्थों में कीटनाशकों का इस्तेमाल सामने आया है।

कीटनाशक यानी पेस्टीसाइड के इस्तेमाल से तैयार व सुरक्षित फल व सब्जियों के कारण ब्लड कैंसर के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण यह खतरा उन मासूमों पर ज्यादा मंडरा रहा है, जिन्होंने ठीक से चलना व बोलना भी नहीं सीखा है। कैंसर हॉस्पिटल में ब्लड कैंसर से पीडि़त लगभग 1000 रोगी दर्ज हैं, जिनमें बच्चों की संख्या ज्यादा है।

मिलावट पर नहीं लगाम
कैंसर हॉस्पिटल के सूत्रों का कहना है कि तम्बाकू से कैंसर होता है, यह बताने के लिए सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी है। लेकिन, खाद्य सामग्रियों में पेस्टीसाइड के उपयोग से होने वाले दुष्प्रभाव को जाहिर करने में दिलचस्पी नहीं ली जा रही है। इस कारण मिलावट पर लगाम नहीं कस पा रही है। सिर्फ फल व सब्जियां ही नहीं अन्य पैक्ड खाद्य सामग्रियों को सुरक्षित रखने में पेस्टीसाइड उपयोग में लाया जा रहा है। इसके चलते कैंसर का खतरा बना हुआ है।

कई तरह के कैंसर
रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल से तैयार फल व सब्जियों के सेवन से कई तरह के कैंसर का खतरा बढ़ रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि फल, सब्जियां व अन्य खाद्य पदार्थों को तैयार करने अथवा सुरक्षित रखने में जो पेस्टीसाइड्स मिलाए जा रहे हैं वे एक अवधि के पश्चात शरीर पर दुष्प्रभाव डालने लगते हैं।

कीटनाशक का छिड़काव बना खतरा
कैंसर रोग विशेषज्ञों का कहना है कि फसलों को कीट पतंगों से बचाने के लिए कीटनाशकों का छिड़काव किया जाता है। कई बार बच्चे भी परिजनों के साथ खेतों में पहुंच जाते हैं। स्प्रे के दौरान कीटनाशक श्वास के साथ फेफड़ों, खून, हड्डियों व लिवर में पहुंच जाता है। शरीर के जिस भी अंग पर कीटनाशक दुष्प्रभाव डालता है उसे कैंसर में बदल देता है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. श्यामजी रावत ने बताया कि कैंसर हास्पिटल में इस वर्ष अब तक 2500 से ज्यादा नए रोगी सामने आ चुके हैं। रोगियों को आवश्यकतानुसार रेडियोथेरेपी व कीमोथेरेपी दी जाती है। वैज्ञानिकों के तमाम शोधों से पता चला है कि खाद्य सामग्रियों में पेस्टीसाइड का इस्तेमाल कैंसर को बढ़ावा दे रहा है।

केस-1
करेली निवासी पांच साल का बच्चा ब्लड कैंसर की चपेट में है। लगभग एक साल से मेडिकल के कैंसर चिकित्सालय में उसका उपचार चल रहा है। इस अवधि में अमित की पढ़ाई छूट चुकी है। सब्जियों व फलों में पेस्टीसाइड का इस्तेमाल ब्लड कैंसर की वजह बताया जा रहा है।

केस-2
11 माह बच्चा गुर्दे के कैंसर से जूझ रहा है। मेडिकल के कैंसर हॉस्पिटल में तीन माह से उसका उपचार जारी है। कैंसर के लिए ठोस वजह का चिकित्सक पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन प्रथमदृष्टया उन्होंने कीटनाशक युक्त फसलों का सेवन करने वाले मवेशियों के दूध को जिम्मेदार बताया है।

केस-3
पनागर निवासी महिला ने कभी तम्बाकू व इसके इस्तेमाल से निर्मित वस्तुओं का सेवन नहीं किया, लेकिन वे 2011 से ब्लड कैंसर से जंग लड़ रही है। परिजन कहते हैं कि सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था, लेकिन अचानक शुरू हुए तेज बुखार के बाद ब्लड कैंसर का पता चला।

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