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खेती का कमाल: मुश्कदाने से आई जिंदगी में “मुस्कान”, आप भी जानिए, लाभ का धंधा बनी खेती 

एक एकड़ में उगा रहा 1 लाख 80 हजार की फसल, सेमीनार से बदली युवा भाईयों की तकदीर, जुगियाकाप में जामारोजा के बाद मुश्कदाने में आजमाया हाथ, मिली सफलता

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Prem Shankar Tiwari

Oct 03, 2016

mushkdana farming in gram jugiyakap

mushkdana farming in gram jugiyakap


बालमीक पाण्डेय @ जबलपुर/कटनी. मेरे देश की धरती सोना उगले-उगले हीरे मोती...मेरे देश की धरती यह सिर्फ देशभक्ति गीत ही नहीं बल्कि यह चरितार्थ हो रहा है शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर ग्राम जुगियाकाप में। जुगियाकाप में कृषक की मेहनत से हीरा-मोती तो नहीं लेकिन रुपयोंं की जमकर बरसात हो रही है। पूरा जिला दो वर्ष से जहां सूखे की चपेट में है तो वहीं दो युवा भाईयों ने खेती की उन्नत तकनीक अपनाकर कृषकों के लिए मिशाल बनकर उभरे हैं। पहले जामारोजा की खेती और अब उसके साथ ही मुश्कदाने में हाथ आजमाकर लाखों रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं। नौकरी, व्यापार, व्यवसाय को अलग कर खेती की राह चुनी और जिंदगी में खुशहाली छा गई है। शहर ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश से कृषक और अधिकारी युवा किसानों की तरकीब को जानने के लिए पहुंच रहे हैं।


9 एकड़ में कर रहे मुश्कदाना की खेती
किसान वरुण यादव व नितिन यादव अपने दोस्त के साथ जुगियाकाप में सिकमी से 75 एकड़ खेत लेकर जहां जामा रोजा उगा रहे हैं, तो वहीं 9 एकड़ में मुश्कदाना की खेती कर रहे हैं। विज्ञान की भाषा में इसे एबिलमोस्कसमोस्केटस व कस्तूरी भिंडी भी कहते हैं। मुश्कदाना का पौधा 3 से लेकर 4.5 फीट ऊंचा झाड़ीनुमा होता है। इसकी पत्तियों और तने पर रोयें होते है। फूल पीले रंग के होते है तथा फल भिंडी के आकार से बड़े होते है और बीज काले रंग के कस्तूरी की गंध लिए होते है। वर्षा ऋतु से पूर्व खेत की तीन जुताई कर ली जाती है। बीज को लाइन से लाइन की दूरी 60 सेमी एवं पौधे से पौधे की दूरी के अनुसार बोया जाता है। गोबर की खाद एवं माइक्रो भू-पावर खाद मिलाते हैं। हालांकि अभी यह फसल कट चुकी है, लेकिन ये युवा किसान इस खेती को बार-बार करना चाहेंगे।


सालाना लाखों का मुनाफा
वरुण ने बताया कि मुश्कदाना की फसल 4 माह में तैयार की है। यह दो फसली खेती है। एक एकड़ में 12 क्विंटल दाने का उत्पादन होता है। 9 एकड़ के मान से 108 क्.ि का उत्पादन वर्ष भर में हुआ है। बाजार में इसकी कीमत 15 हजार रुपए प्रति क्वि. है। 9 एकड़ में 16 लाख 20 हजार रुपए का उत्पादन हो रहा है। जब्कि गेंहू व धान सहित अन्य फसल में सिर्फ 25 से 30 हजार रुपए का उत्पादन होता है। वहीं एक एकड़ की खेती में मात्र 15 से 20 हजार रुपए का खर्च आ रहा है।

इत्र और क्रीम में होता है उपयोग
किसान ने बताया कि मुश्कदाना के बीज में सुगन्धित तेल पाया जाता है। इसमें बीज में एम्ब्रेटोलाइट तथा फार्निसोल नामक रसायन होते हैं। इसका उपयोग इत्र, क्रीम, पाउडर सहित तंबाखू आदि में होता है। इसके साथ ही दवा के रूप में तेल का उपयोग होता है। एक किवंटल में 10 से 12 लीटर ऑयल प्लांट में ही निकाल कर 42 हजार रुपए लीटर के मान से गुजरात और चायना के लिए भेजते हैं।


सेमीनार ने बदली जिंदगी की राह
वरुण ने बताया कि करीब दो वर्ष पूर्व नागपुर में हाईटेक खेती करने का सेमीनार आयोजित हुआ था, जिसमें वे दोनों भाई शामिल हुए। वहां से लौटने के बाद खेती की राह चुनी। जामारोजा, मुश्कदाना, मुनगा सहित कई हाईटेक खेती कर रहे हैं। दोनों भाई अपने दोस्त के साथ मिलकर उक्त खेती से अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं।

mushkdana farming in gram jugiyakap

खुद तैयार करते हैं ऑयल
युवा किसानों ने खेत में जामारोजा और मुश्कदाना से ऑयल तैयार करने के लिए प्लांट लगा रखा है। फसल तैयार होते ही घास व मुश्कदाने से ऑयल निकालकर न सिर्फ देश बल्कि विदेश में निर्यात कर रहे हैं। किसानों की इस तरकीब ने यदि जिले में जोर पकड़ा तो किसानों की तकदीर बदल सकती है। दोनों फसलों की खेती में सबसे अच्छी खासियत यह है कि कम लागत और बगैर नुकसान की फसल है।

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