18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

युद्ध में बारूद से भी बेअसर रहता है यह ट्रक, जानें इसकी खासियत

वैसे तो ये सेना के साधारण ट्रक जैसे दिखते हैं पर ये हैं बड़े खास

2 min read
Google source verification
Indain army exibition

Indain army exibition

जबलपुर . वैसे तो ये सेना के साधारण ट्रक जैसे दिखते हैं पर ये हैं बड़े खास। जब चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन सीमा पर घात लगाए बैठे हैं तब इनका महत्व बढ़ जाता है। वीकल फैक्ट्री में बन रहे माइन प्रोटेक्टेड वीकल (एमपीवी) सेना के लिए मुफीद बने हुए हैं। सेना इस वाहन का इस्तेमाल सीमा पर गश्त में कर रही है। आतंकियों को क्षमता की ज्यादा जानकारी नहीं होने से वहां घटनाएं कम होती हैं। अब नक्सली क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखकर वीकल फैक्ट्री इसका अपग्रेड वर्जन मॉडीफाइड माइन प्रोटेक्टेड वीकल बना रही है। वीएफजे में एमएमपीवी का प्रोजेक्ट चल रहा है। इसका प्रोटोटाइप तैयार किया जा रहा है। बीच में प्रबंधन ने इसे रोलऑन किया था, लेकिन कुछ कलपुर्जों की कमी की वजह से काम पूरा नहीं हुआ। यह वाहन नक्सली क्षेत्रों में ज्यादा कारगर होगा। क्योंकि, इसमें कई एडवांस फीचर हैं, जो सेना या रिजर्व बल के जवानों को ज्यादा रखेंगे। फिलहाल केंद्रीय रिजर्व बल एवं राज्यों की पुलिस ने इसे मांगा है क्योंकि, नक्सली घटनाएं बढ़ रही हैं।


२४४ एमपीवी बनाकर देना
वीकल फैक्ट्री जबलपुर को जून तक ५० एमपीवी बनाने का लक्ष्य मिला है। फैक्ट्री को निर्धारित योजना के मुताबिक सेना को २४४ एमपीवी बनाकर देना है। इसमें वित्तीय वर्ष २०१७-१८ मेें ५० वाहन तैयार करने थे। लेकिन, मटेरियल की कमी की वजह से यह काम पूरा नहीं हुआ। इसलिए फैक्ट्री प्रबंधन ने आयुध निर्माणी बोर्ड से अतिरिक्त समय मांगा गया था। इस अवधि में वाहन तैयार हो सकें, इसके लिए एमपीवी अनुभाग में तेजी के साथ काम किया जा रहा है। अब तक २५ गाडि़यां फाइनल होने की स्थिति में हैं।


माइंस और गोलीबारी से सुरक्षा
वीकल फैक्ट्री जबलपुर में तैयार इस वाहन की खूबी यह है कि इसके नीचे यदि १० से १४ किलो टीएनटी आ जाए तो इसमें बैठे सैनिक सुरक्षित रहते हैं। यही नहीं सीमा पर हर समय गोली-बारी होती रहती है। उसमें भी
यह वाहन जवानों की रक्षा करता है। क्योंकि, यह पूरी तरह बुलेट पू्रफ है। जानकारों ने बताया कि ७.६२ एसएलआर से १० मीटर की दूरी से भी हमला किया जाए, तो इस पर कोई असर नहीं होता।


वीएफजे के अपर महाप्रबंधक डीसी श्रीवास्तव बताते हैं कि एमपीवी का उत्पादन किया जा रहा है। जून तक तय लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। मटेरियल की आपूर्ति भी अच्छी है, इसलिए बेहतर परिणाम आएंगे।