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जिनसे थर्राता है अमेरिका, वे जवान यहां सीख रहे शांति का पाठ

- भारत के अनुभवों का उठाएंगे लाभ

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जबलपुर. वियतनाम की पीपल्स आर्मी और भारतीय सेना के अधिकारियों के बीच पहला द्विपक्षीय शीर्ष पटल युद्ध अभ्यास (टेबल टॉप एक्सरसाइज) ग्रेनेडियर्स रेजीमेंटल सेंटर (जीआरसी) में सोमवार से शुरू हो गया। संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में ज्यादा योगदान देने के लिए वियतनामी सेना अनुभवी देश के साथ पहली बार इस तरह का युद्धाभ्यास कर रही है। सोमवार को पहले दिन उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) शांति सेना की गाइनलाइन की जानकारी ली। ३ फरवरी तक दूसरी नीतियों से भी अवगत कराया जाएगा। प्रशिक्षित सेना को वर्ष २०१९ में शांति सेना में भेजा जाएगा।


दोनों देशों के १५-१५ अधिकारी शामिल
अभी तक वियतनाम पर्यवेक्षक या स्टाफ, ऑफिसर को भेजता रहा है। अब वह पीपल्स सेना की तरफ से इंजीनियर और चिकित्सकों को भेजेगा। दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों ने अपने उद्देश्यों से अवगत कराया। भारत की तरफ से हेडक्वार्टर मध्य भारत एरिया के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल संजीव कनाल ने सैन्य कार्यक्रम का विवरण दिया। वियतनाम की ओर से सीनियर कर्नल और कमांडेंट वियतनाम संयुक्त राष्ट्र शांति सेना (टे्रनिंग) लू डेन हेन ने जानकारी साझा की। दोनों देशों के १५-१५ अधिकारी इसमें शामिल हैं।


शांति सेना में हमारा बड़ा योगदान
जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल संजीव कनाल ने बताया कि भारत का संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में योगदान द्वितीय विश्व युद्ध के समय से रहा है। देश की सेना के जनरल शांति सेना के कमांडर रहे हैं। भारत की तरह वियतनाम की सेना भी अनुभवी है। लंबे अनुभव के कारण वियतनाम की सेना ने देश को इस अभ्यास के लिए चुना है। यह अभ्यास भारत और वियतनामी सरकार के बीच रक्षा क्षेत्र में समझौता के तहत भी किया जा रहा है। जीआरसी का चयन इस काम के लिए किया जाना हमारे के लिए गर्व का विषय है।


इस तरह होगा अभ्यास
इसमें हथियारों से नहीं बल्कि रणनीतिक अभ्यास किया जाएगा। शांति सेना की गाइडलाइन के मुताबिक उसके तरीके बताए जा रहे हैं। अगले पांच दिनों तक सारी गतिविधियों पर अधिकारी चर्चा करेंगे।


भारत के अनुभवों का उठाएंगे लाभ
वियतनाम की पीपल्स आर्मी में सीनियर कर्नल लू डेन हेन ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि भारतीय सेना हमेशा से संयुक्त राष्ट्र सेना का हिस्सा रही है। इसका लाभ हम लेना चाहते हैं। यह पहला मौका है जब टेबल टॉप एक्सरसाइज में शामिल हो रहे हैं। हमारे लिए सीखने के लिए यहां पर बहुत कुछ है। जीआरसी में सीखने के लिए बहुत अच्छा वातावरण और अधोसंरचना है।