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Interesting Facts: जब एक मंदिर के लिए नर्मदा ने बदल दी थी अपनी दिशा

एक अनोखा मंदिरः इसी स्थान पर भगवान शिव और माता पार्वती ने किया था विश्राम...। दिलचस्प है इस मंदिर की कहानी...।

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मध्य प्रदेश के जबलपुर में है यह शिव-पार्वती का अनोखा मंदिर, जिसके लिए नर्मदा नदी ने अपनी दिशा ही बदल दी थी। विश्व प्रसिद्ध यह मंदिर भेड़ाघाट में है और 70 फीट ऊंची पहाड़ी पर है। संभवतः देश में यह इकलौता मंदिर है जिसमें शिव और पार्वती के विवाह की प्रतिमा स्थापित है।

प्राचीन मान्यताओं के अनुसार जब भगवान शिव और माता पार्वती भ्रमण के लिए निकले तो उन्होंने भेड़ाघाट के निकट एक ऊँची पहाड़ी पर विश्राम किया। उसी स्थान पर सुवर्ण नामक ऋषि तपस्या कर रहे थे, भगवान शिव को देखकर ऋषि सुवर्ण खुश हुए और उनसे प्रार्थना की थी कि जब तक वे नर्मदा पूजन कर वापस न लौटें, तब तक भगवान शिव उसी पहाड़ी पर रहें। नर्मदा पूजन करते समय ऋषि सुवर्ण ने विचार किया कि यदि भगवान हमेशा के लिए यहाँ विराजमान हो जाएँ तो इस स्थान का कल्याण हो जाएगा इसी के चलते ऋषि सुवर्ण ने नर्मदा में समाधि ले ली।

इसलिए बदला था अपना रास्ता

माना जाता है कि इस पहाड़ी पर भगवान शिव ने नर्मदा को अपना मार्ग बदलने का आदेश दिया था ताकि उनके भक्तों को मंदिर पहुँचने में कठिनाई न हो। इससे पहाड़ी की चट्टानें मुलायम हो गईं और नर्मदा बिना किसी कठिनाई के अपना मार्ग बदल सकी।


कल्चुरी शासक युवराजदेव प्रथम ने चौसठ योगिनी मंदिर का निर्माण 10वीं शताब्दी में कराया था और उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती सहित योगिनियों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए बनवाया था। और फिर, 12वीं शताब्दी के दौरान गुजरात की रानी गोसलदेवी ने चौसठ योगिनी मंदिर में गौरी-शंकर मंदिर का निर्माण करवाया।

कभी हुआ करता था तंत्र साधना का केंद्र

यह मंदिर भी तंत्र साधना का एक महान स्थान हुआ करता था, जहाँ लोग तंत्र साधना, ज्योतिष, गणित, संस्कृत साहित्य और तंत्र विज्ञान का अध्ययन करते थे। यहाँ पर छात्र देश और विदेश से आते थे। 10वीं शताब्दी में यहाँ आयुर्वेद कॉलेज भी था जहाँ खुले आसमान के नीचे ग्रह और नक्षत्रों की गणना और आयुर्वेद की शिक्षा दी जाती थी, यहाँ अद्भुत ज्ञान की संग्रहशाला भी थी।

कैसे पहुँचे जबलपुर

मध्यप्रदेश का एक बड़ा शहर है जबलपुर। इस शहर में भी कई पर्यटक स्थल है। इसलिए यहां बड़ी संख्या में टूरिस्ट आते हैं। यह शहर कई राज्यों से सीधे ट्रेन मार्ग से जुड़ा हुआ है और यहां एयरपोर्ट भी है, जहां की शहरों से सीधी फ्लाइट उपलब्ध है। यहां के एयरपोर्ट का नाम डुमना एयरपोर्ट भी है। जबलपुर पहुंचने के लिए सीधे जबलपुर पहुंचा जा सकता है, या भोपाल एयरपोर्ट पहुंचकर भी सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है। ट्रेन से आने वालों के लिए जबलपुर जंक्शन तक पहुंचा जा सकता है। इसके बाद भेड़ाघाट के करीब ही यह मंदिर है।