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जबलपुर क्लब लीज मामले में सुप्रीम कोर्ट से निगम को मिला स्टे

हाईकोर्ट की डबल बेंच के आदेश पर लगाई रोक, नगर निगम व जबलपुर क्लब के बीच लीज नवीनीकरण और कब्जे की रस्साकस्सी दिलचस्प मोड़ पर

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reetesh pyasi

Mar 09, 2016

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जबलपुर नगर निगम व जबलपुर क्लब के बीच लीज नवीनीकरण और कब्जे की रस्साकस्सी दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। हाईकोर्ट की डबल बेंच द्वारा क्लब के पक्ष में पारित आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को रोक लगा दी। नगर निगम द्वारा इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। निगम की तरफ से अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया मुकुल रोहतगी ने पैरवी की। उनके साथ निगम अधिवक्ता अंशुमान सिंह भी मौजूद रहे। वहीं क्लब का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र श्रीवास्तव ने रखा।
निगम अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने बताया कि जबलपुर क्लब को निगम ने 13 फरवरी 1926 में 30 साल के लिए 92,352 वर्गफीट भूमि लीज पर दी थी। 1969 में क्लब ने व्यावसायिक उपयोग के लिए दुकानों के निर्माण की अनुमति मांगी। इस पर निगम ने कुल क्षेत्रफल का एक चौथाई हिस्सा वापस मांगा। क्लब ने 8 हजार 471 वर्गफीट भूमि सड़क निर्माण के दौरान निगम को वापस की, लेकिन 14 हजार 617 वर्गफीट भूमि अब तक वापस नहीं की। इस लीज का दो बार नवीनीकरण हो चुका है।

27 नवंबर को क्लब के पक्ष में था आदेश
क्लब के आधिपत्य की भूमि में कब्जा होने पर 1999 में तत्कालीन कमिश्नर रमेश थेटे ने अतिक्रमण हटाकर इसे अपने कब्जे में ले ली थी। लीज निरस्त करने की नोटिस दिया था। इस पर क्लब ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। 27 नवंबर और सात दिसंबर 2015 को न्यायालय ने पक्ष में फैसला सुनाते हुए क्लब को भूमि लौटाने का निर्देश निगम को दिया था। निगम अधिवक्ता अंशुमान सिंह के मुताबिक इसी आदेश को निगम ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने निगम के पक्ष में स्टे देते हुए यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।

नहीं हुआ नवीनीकरण
जबलपुर क्लब के सचिव आनंद मोहन पाठक के मुताबिक लीज नवीनीकरण के लिए 23 दिसंबर 2015 को निगम को आवेदन दिया गया था, लेकिन अब तक लीज का नवीनीकरण नहीं किया गया। इसकी लीज 12 फरवरी 2016 को समाप्त हो गई है।

होटल, दुकानें संचालित
वर्तमान में क्लब की भूमि पर तीन मंजिला बिल्डिंग बन चुकी है। इसमें एक होटल सहित दो दर्जन से अधिक दुकानें संचालित है। निगम इसे अपने कब्जे में लेने की कवायद में जुटा है।

कब क्या हुआ
1. 90 साल पहले क्लब के लिए आवंटित हुई थी भूमि
2. 1969 में क्लब ने भूमि के व्यावसायिक उपयोग की
मांगी थी अनुमति
3. एक चौथाई भूमि वापस करने की अब तक पूरी नहीं की शर्त
4. 30-30 साल के लिए होता रहा लीज का नवनीकरण
5. 92 हजार 352 वर्गफीट भूमि का हुआ था आवंटन
6. क्लब ने 8 हजार 471 वर्गफीट भूमि सड़क निर्माण के दौरान निगम को किए थे वापस
14 हजार 617 वर्गफीट भूमि अब तक नहीं किए वापस

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