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जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के सीनियर जज जस्टिस सुजय पाल ने जिला अदालत में 1255 पदों पर नियुक्ति को चुनौती के मामले के बाद शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति में आरक्षण लागू न किए जाने के रवैये को चुनौती के मामले की सुनवाई से भी खुद को अलग कर लिया। उन्होंने यह मामला चीफ जस्टिस रवि मलिमठ को भेज दिया। ताकि वे स्वविवेक से इस मामले की सुनवाई के लिए पृथक युगलपीठ का गठन करें, जिसमें जस्टिस पाल को सदस्य न बनाया जाए।
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ये है मामला
जबलपुर की अधिवक्ता छोटी कुशराम की ओर से याचिका दायर की गई। अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, उदय कुमार व अन्य ने कोर्ट को बताया कि मध्य प्रदेश में 800 से अधिक शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति में अजा-जजा के अधिवक्ताओं को आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया है। यह मामला सोमवार को जस्टिस सुजय पाल व जस्टिस पीसी गुप्ता की डिवीजन बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए नियत था। लेकिन उन्होंने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।
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चीफ जस्टिस ने मंगाए रिकॉर्ड, नई बेंच होगी गठित
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि मलिमठ ने जिला अदालतों में 1255 भर्तियों व शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्तियों में आरक्षण के प्रावधान का समुचित पालन न किए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं संबंधी रिकॉर्ड तलब कर लिया। जल्द ही सुनवाई के लिए नई बेंच निर्धारित की जाएगी।
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Published on:
05 Jul 2022 07:16 pm
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