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Jabalpur News : एक साल बाद लौटी खुशखबरी, न बोल सकीं न पता बता सकीं मां, 5 हजार तस्वीरों ने मिलाया

Phoolmat Return Home : अपनों से दूर आश्रय स्थल में बीता फूलमत का एक साल। एमपी और छत्तीसगढ़ में साझा हुईं 5 हजार से अधिक तस्वीरों के बाद हो सकी पहचान।
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Phoolmat Return Home

एक साल बाद लौटी खुशखबरी (फोटो सोर्स: AI Generated)

Jabalpur News : करीब एक साल पहले घर से निकली छत्तीसगढ़ रहने वाली फूलमत सहाय की तलाश आखिरकार मध्य प्रदेश के जबलपुर में पूरी हो गई है। बोलने और सुनने में असमर्थ फूलमत एक साल तक अपनों से दूर जबलपुर के आश्रय स्थल में रहीं। इस दौरान न तो वो अपना नाम बता सकीं, न पता और न ही परिवार तक पहुंचने का कोई रास्ता बता पाईं। परिवार और पुलिस की तलाश भी लम्बे समय तक किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। इस बीच उनकी तस्वीरें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में लगातार साझा की जाती रहीं।

5 हजार से अधिक तस्वीरों के प्रसार के बाद छत्तीसगढ़ के दिलीप जायसवाल ने उन्हें पहचान लिया। पहचान की पुष्टि होते ही परिवार तक खबर पहुंची तो एक साल से थमी उम्मीद फिर लौट आई। अब उनके बेटे मंगल और भतीजे मेघनाथ साय उन्हें लेने जबलपुर आएंगे।

बहू से विवाद के बाद घर से निकल गईं थीं

अनूपपुर रेलवे पुलिस ने अगस्त 2025 में फूलमत को बिना टिकट जबलपुर लाकर आश्रय स्थल पहुंचाया था। वो बोलने और सुनने में असमर्थ थीं और पढ़ने - लिखने में भी सक्षम नहीं थीं। ऐसे में अपने बारे में कोई जानकारी देना उनके लिए संभव नहीं था। परिवार का पता नहीं चलने के कारण उनका जीवन आश्रय स्थल तक सिमट गया।

छत्तीसगढ़ तक बढ़ाई गई जांच

संस्था में रहने के दौरान फूलमत ने सांकेतिक भाषा के माध्यम से इतना जरूर बताया कि, बहू से विवाद के बाद वो घर से निकली थीं। उन्होंने ये भी संकेत दिया कि, वो वापस अपने परिवार के पास जाना चाहती हैं। इसके बाद उनके परिवार की तलाश शुरू की गई। जांच में पता चला कि, छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के उदयपुर इलाके में करीब एक साल पहले एक महिला के गुम होने का मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद तलाश को छत्तीसगढ़ तक बढ़ाया गया।

हाथ के निशान ने दिखाई तलाश की राह

फूलमत के हाथ पर बने एक निशान ने उनकी पहचान की तलाश को नई दिशा दी। इसी आधार पर उनके छत्तीसगढ़ में होने की संभावना जताई गई। इसके बाद मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में उनकी तस्वीरें सामाजिक संगठनों, संस्थाओं, विभिन्न समूहों और पुलिस ग्रुपों में साझा की जाने लगीं। धीरे - धीरे यह तस्वीरें हजारों लोगों तक पहुंचीं। अलग - अलग माध्यमों से 5 हजार से अधिक तस्वीरें प्रसारित की गईं, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी। तलाश हालांकि रुकी नहीं।

अपनों से दूर रहने का दर्द झेला

परिवार से बिछड़ने का दर्द फूलमत के लिए और कठिन था, क्योंकि वो अपनी बात किसी को बोलकर या लिखकर नहीं बता सकती थीं। संस्था में रहने के दौरान वो कई बार निराश होकर वहां से चली जाती थीं। हर बार उन्हें तलाश कर वापस लाया गया। लगातार अकेलेपन और तनाव के बीच उन्होंने एक बार जान देने तक का प्रयास भी किया।

अब बेटे से होगा मां का मिलन

फूलमत की पहचान होने के बाद उनके बेटे मंगल और भतीजे मेघनाथ सहाय उन्हें लेने छत्तीसगढञ से रवाना हो चुके हैं। परिवार छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के अंदरूनी ग्रामीण क्षेत्र में रहता है और किसान परिवार से जुड़ा है। करीब एक साल से जिस मां का कोई पता नहीं था, अब वही मां परिवार के सामने होगी। लंबे इंतजार के बाद फूलमत की पहचान ने परिवार को सिर्फ उनकी खबर ही नहीं दी, बल्कि उनसे दोबारा मिलने की उम्मीद भी लौटा दी है।

'ये किसी चमत्कार से कम नहीं'

शक्ति सदन के संचालक अंशुमन शुक्ला का कहना है कि, ये किसी चमत्कार से कम नहीं है। जिसकी जिंदगी और जिंदा होने की आस सभी ने लगभग छोड़ दी थी, वो मां एक साल बाद अपने परिवार से मिलने जा रही है। महिला के बोलने और सुनने में असमर्थ होने के कारण परिवार की तलाश बेहद चुनौतीपूर्ण थी। हाथ के निशान के आधार पर एमपी और छत्तीसगढ़ में हजारों तस्वीरें साझा की गईं। आखिरकार उनकी पहचान हो सकी।