छोटी उम्र के बच्चों को घर, पड़ोस, रास्ते में और यहां तक कि स्कूल-कोचिंग में छेड़खानी जैसी घटनाआें का सामना करना पड़ता है लेकिन वे डर और संकोच की वजह से कुछ बता नहीं पाते। निर्भीक बचपन अभियान के तहत बच्चों का यही डर खत्म करने की कोशिश जारी है। जिसके चलते अब बच्चों को यह भी सिखाया जा रहा है कि वे अपने घर के दूसरे बच्चों, भाई-बहनों और पड़ोस के दोस्तों को भी यही जानकारी दें।