याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विवेक रंजन पांडे ने कोर्ट को बताया कि संविधान के तहत रिट याचिका, जमानत की अर्जियां जैसे मूल अधिकार अधिनियम के जरिए एक तरह से छीन लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए संविधान में संशोधन करना चाहिए, जो राज्य सरकार का विषय नहीं है। इस पर राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि लॉ कमीशन ने 2005 में पेश की गई 192वीं रिपोर्ट में तंग करने वाली मुकदमेबाजी पर रोक लगाने की अनुशंसा की थी। इसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को इस पर अधिनियम बनाने के निर्देश दिए थे, ताकि एेसे मुकदमों में अदालतों का बेशकीमती समय नष्ट न हो।