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जेडीए को अध्यक्ष की तलाश, छह साल से इंतजार, विकास भी चौपट

जेडीए को अध्यक्ष की तलाश, छह साल से इंतजार, विकास भी चौपट  

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जबलपुर. शहर में चंडीगढ़ की तर्ज पर सेक्टोरल विकास के साथ नई टाउनशिप विकसित करने से लेकर नया ट्रांसपोर्ट नगर, नए औद्योगिक क्षेत्र के प्रोजेक्ट गति नहीं पकड़ सके हैं। पिछले वर्षों में जेडीए ने 3 नई विकास योजनाएं लॉन्च की, लेकिन इनमें से किसी में भी जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हुआ।

शहर में नई टाउनशिप विकसित करने का सपना अधूरा

मास्टर प्लान के अनुसार निवेश क्षेत्र में विकास कार्यों को गति देने की जिम्मेदारी जबलपुर विकास प्राधिकरण की है। छह साल से जेडीए के पास अध्यक्ष नहीं होने से नीतिगत निर्णय नहीं हो रहे। सम्भागायुक्त जेडीए के पदेन अध्यक्ष की जिम्मेदारी सम्भालते रहे हैं। पांच प्रशासनिक अधिकारी बदले, लेकिन किसी के भी कार्यकाल में नई योजना में काम शुरू नहीं हो सका। प्रदेश सरकार ने हाल में सभी निगम, मंडल, बोर्ड को भंग कर दिया है। उम्मीद जगी है कि जेडीए को जल्दी ही नया नियमित अध्यक्ष मिल सकता है।

इन अधिकारियों ने संभाला पदभार
जेडीए में पिछले 6 साल में पदेन अध्यक्ष के तौर पर पांच अधिकारी बदल चुके हैं। इनमें संभागायुक्त राजेश बहुगुणा, रविन्द्र मिश्रा, महेशचंद्र चौधरी, बी चंद्रशेखर, अभय वर्मा शामिल हैं। इससे पहले डॉ. विनोद मिश्रा जेडीए के नियुक्त किए गए अध्यक्ष थे। 2018 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी फिर कुछ समय बाद भाजपा की सरकार बन गई। लेकिन दोनों ही सरकारों के कार्यकाल में जेडीए अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो सकी।

ये होता है मुख्य अंतर
संभागायुक्त के जेडीए के पदेन अध्यक्ष होने पर उनके पास संभागभर के जिलों से संबंधित जिम्मेदारी होने के साथ, राजस्व न्यायालय से संबंधित दायित्व और मेडिकल कॉलेजों का भी जिम्मा होता है। ऐसे में वे पूरा समय प्राधिकरण को नहीं दे पाते। जबकि प्राधिकरण के पास नियमित अध्यक्ष व बोर्ड होने पर वे नियमित बैठक लेते हैं। विकास योजनाओं की निगरानी के साथ ही उनकी समय-समय पर समीक्षा करते हैं। किसी स्वीकृति को लेकर विभागों के बीच रोड़ा अटकने के मामले में समन्वय बनाने का काम करते हैं। इसके साथ ही विकास कार्यों को लेकर प्रदेश शासन व केन्द्रीय शासन से सीधे अपनी मांग रख पाते हैं।

विकास की ये योजनाएं ठप
जेडीए की योजना 63, 64 व 65 पूर्व अध्यक्ष डॉ.विनोद मिश्रा के कार्यकाल में स्वीकृत हुई थीं। यहां नए रहवासी, व्यावसायिक व औद्योगिक क्षेत्र का विकास होना है। इसके साथ इन क्षेत्रों में सेक्टोरल विकास होना है। स्कूल, कॉलेज, अस्पताल व अन्य संस्थानों के लिए जमीन आरक्षित है। इसके अलावा नए ट्रांसपोर्ट नगर का निर्माण भी इसी क्षेत्र में होना है। ये काम शुरू करने से पहले क्षेत्र की मुख्य सडक़ों का निर्माण आवश्यक है। इसके बाद क्षेत्र में कनेङ्क्षक्टग सडक़, पुल-पुलियों का निर्माण हो सकेगा। लेकिन सडक़ों का निर्माण नहीं हो सका। इसी तरह से धनवंतरि नगर व विजय नगर इलाकों को जोडऩे के लिए आवश्यक रेलवे ओवरब्रिज की फाइल भी आगे नहीं बढ़ सकी।

जन प्रतिनिधि के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालने पर जेडीए की विकास योजनाओं में निगरानी से लेकर नियमित समीक्षा की जाती है। अपने कार्यकाल में योजना क्र.62,63,64,65 स्वीकृत कराईं थीं, लेकिन बाद में उन पर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण कुछ योजनाएं लैप्स हो गईं।
- डॉ. विनोद मिश्रा, पूर्व अध्यक्ष, जेडीए