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CJI Deepak Mishra का इस शहर से है गहरा जुड़ाव, ऐसी है उनकी इमेज

सीजेआई के खिलाफ महाभियोग की तैयारी

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justice deepak mishra latest news

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जबलपुर। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ विपक्ष ने महाभियोग लाने की तैयारी शुरू कर दी है। मीडिया रिपोट्र्स के अनुसार कांग्रेस ने कई अन्य दलों से भी महाभियोग प्रस्ताव का प्रस्तावित मसौदा भेजकर उनका समर्थन मांगा है। एनसीपी के नेता डीपी त्रिपाठी ने कहा, कई विपक्षी दलों ने सीजेआइ दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के ड्रॉफ्ट पर हस्ताक्षर किए हैं।


जस्टिस दीपक मिश्रा का जबलपुर से जुड़ाव
भारत के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा का मध्यप्रदेश से गहरा जुड़ाव रहा है। उन्होंने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एक दशक से अधिक अवधि तक अपनी सेवाएं दी थीं। जबलपुर हाईकोर्ट में अपनी सेवाओं के दौरान वे न्याय के लिए बेहद सख्त मिजाज माने जाते थे। हालांकि सहकर्मियों, अन्य न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं से वे काफी सहजता से मिलते थे। उनके समय में काम कर चुके अधिवक्ता उन्हें आज भी सहज-सरल व्यक्त्तिव के रूप में याद करते हैं।


लंबे समय तक रहे न्यायाधीश
वे 3 मार्च 1997 को उड़ीसा से स्थानांतरित होकर यहां आए थे। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में कार्यरत रहते हुए जस्टिस मिश्रा 19 दिसम्बर 1997 को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए। यहां मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष के तौर पर लोक अदालतों को गति देकर सहज, सुलभ व त्वारित न्यायदान को नए आयाम दिए। बाद में वे 3 दिसम्बर 2009 को पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुए। इसके बाद 24 मई 2010 को उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। 10 अक्टूबर 2011 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने। इतनी लंबी सेवाओं के बाद वे सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश बनाए गएं। 3 अक्टूबर 1953 को जन्मे और 14 फरवरी 1977 से वकालत का शुभारंभ करने वाले सीजेआई दीपक मिश्रा का कार्यकाल 2 अक्टूबर 2018 तक निर्धारित है।


दिए अनेक ऐतिहासिक फैसले
सीजेआई बनने के पूर्व उन्होंने अनेक ऐतिहासिक फैसले दिए थे। सिनेमाघरों में राष्ट्रगान इन्होंने ही अनिवार्य किया था। स्वतंत्र भारत में पहली बार जब आधी रात में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाइ हुयी थी तब वे भी इस ऐतिहासिक सुनवाई के साझीदार बने थे। मुंबइ ब्लास्ट के दोषी याकूब मेनन की अर्जी पर उन्हीं की अगुवाइ में बनी बेंच ने सुनवाई की थी और बाद में याकूब की अर्जी खारिज कर दी गयी थी।