
worshiped on Diwali
जबलपुर. पांच दिवसीय दीपोत्सव का आगाज शनिवार को धनतेरस के साथ हो जाएगा। दिवाली 24 अक्टूबर को मनाई जाएगी। दिवाली पर इस बार कोलकाता से आईं लक्ष्मी प्रतिमाओं और मुम्बई से आई गणेश प्रतिमाओं का पूजन होगा। इसके अलावा मझौली, सिहोरा और जबलपुर के गांवों में बनीं ग्वालन, लक्ष्मी गणेश भी पूजे जाएंगे। खूबसूरत और आकर्षक दिखने वाली लक्ष्मी गणेश की प्रतिमाएं बाजार में हजारों रुपए तक की कीमत में मिल रही हैं। लोग इन्हें पसंद कर रहे हैं। बाजार में प्रतिदिन चहलपहल बढ़ रही है।
मुम्बई, कोलकाता की कला पसंद
लक्ष्मी, गणेश व आकर्षक दीयों से बाजार गुलजार है। अधिकतर दुकानों में फैंसी लक्ष्मी, गणेश की प्रतिमाएं और दीये मिल रहे हैं। दुकानदार सनी ठाकुर ने बताया पिछले कुछ साल में स्थानीय मूर्तियों की अपेक्षा फिनिशिंग और सुंदर दिखने वाली मूर्तियों की डिमांड जबरदस्त बढ़ी है। जिसमें कोलकाता, मुम्बई, अकोला, अमरावती समेत महाराष्ट्र के अन्य जिलों से आने वाली मूर्तियां शामिल हैं। जो टेराकोटा, चॉकमिट्टी की बनी होती हैं। इन्हें मोती, लेस, कपड़ों से सजाकर बाजार में रखा जाता है। जिनकी कीमत 100 रुपए से 10 हजार रुपए तक होती है। दो दिन में ही दर्जनों महंगी मूर्तियां बिक गई हैं। वहीं फैंसी दीये भी 5 से 25 रुपए तक में बिक रहे हैं। पहले फैंसी मूर्तियां सिविक सेंटर, सदर, गोरखपुर, सिविल लाइन्स जैसे क्षेत्रों में ही मिलती थीं। इस बार पारम्परिक बाजारों में भी इनकी दुकानें सज गई हैं।
यहां सज गईं दुकानें
छोटा फुहारा, बड़ा फुहारा, रांझी बाजार, गढ़ा, अधारताल, आईटीआई, ग्वारीघाट के पारम्परिक बाजारों में सबसे ज्यादा स्थानीय कलाकारों द्वारा बनाई गई मूर्तियां बिक रही हैं।
आसपास के गांवों में मिट्टी से तैयार की गईं हैं मूर्तियां
स्थानीय स्तर पर आसपास के गांवों समेत मझौली, पाटन, कटंगी व अन्य क्षेत्रों में पारम्परिक लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां अब भी मिट्टी से ही तैयार की जा रही हैं। जो बाजार में बड़ी संख्या में उपलब्ध हैं। इनकी कीमत 25 रुपए से 300 रुपए तक साइज एवं फिनिशिंग के अनुसार मिल रही हैं। दीये भी स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में तैयार किए गए हैं जो 30 रुपए से 40 रुपए तक में 25 नग मिल रहे हैं।
Published on:
19 Oct 2022 10:26 am
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