जबलपुर. सीखने और पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। भले ही वह डिग्री का मामला हो या फिर खुद को साक्षर बनाने का। उम्र के 62वें पड़ाव में भी खुद को साक्षर करने के लिए बेझिझक होकर किताबों को हाथों में थाम लिया। हम बात कर रहे हैं अनवर हुसैन की। मोतीनाला चांदनी चौक में रहने वाले अनवन काम धंधे के चलते र पढ़ाई पूरी नहीं कर सके। काम में ऐसे उलझते चले गए कि इस तरफ ध्यान ही नहीं गया। इस बीच नवभारत साक्षर अभियान के तहत उन्होंने फिर से पढ़ाई का मन बनाया। हुसैन साक्षर बनने के लिए प्राथमिक शाला मोतीनाला केद्र में परीक्षा देने के लिए पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि पढ़ाई ही है जो कि मनुष्य के जीवन में हमेशा काम आती है। इसके लिए समय उम्र नहीं देखी जाती। इसी तरह प्रताप धर्मकांटा निवासी राजनदंनी चौधरी, महगंवा निवासी गुड्डी भूमिया भी साक्षर होने के लिए परीक्षा देने के लिए आई थी। प्राथमिक शााला दीक्षितपुरा में परीक्षा देने के लिए आई। उन्होनें बताया कि किन्हीं कारणों के चलते उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई थी। लेकिन खुद के बच्चों को पढाने के लिए खुद को भी पढ़ना आना जरूरी है। इसी को देखकर उन्होंने साक्षर होने का संकल्प लिया।
एक साल चली पढ़ाई
बताया जाता है नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत एक साल तक ऐसे असाक्षरों को केंद्रों में अक्षर साथियों की मदद से पढ़ाई कराई गई। पढ़ाई के दौरान कितना अक्षर ज्ञान हुआ है, कहां तक सीखे हैं इसे लेकर मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक मूल्यांकन परीक्षा का पहली दफे आयोजन किया गया था। विकासखंड सह समन्वयक केशव दुबे ने बताया कि सामाजिक चेतना केद्रों में इस परीक्षा का आयोजन किया गया। जबलपुर नगर में 63 केंद्रों में परीक्षा का आयोजन किया गया। जिसमें करीब 2600 से अधिक लोग शामिल हुए।
ए ग्रेड लाना होगा आवश्यक
परीक्षार्थियों को लिखने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा उत्तरपुस्तिकाओं और प्रश्नपत्रों को दिया गया। अब इसका मूल्यांकन किया जाएगा। परीक्षा में परीक्षार्थी को 60 फीसदी से अधिक अंक आने पर ए ग्रेड दिया जाएगा। ए ग्रेड के आधार पर ही इन्हें उत्तीर्ण माना जाएगा। परीक्षा का प्रमाण पत्र राष्ट्रीय ओपन स्कूल के द्वारा दिया जाएगा। दक्षता हासिल न कर पाने वालों की फिर से पढ़ाई कराकर परीक्षा ली जाएगी। जिले में आयोजित ही परीक्षा को लेकर प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी अंजनी सेलट, एपीसी घनश्याम बर्मन ने परीक्षा केंद्रों का भ्रमण किया।