18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जबलपुर

जंगल में सीमित जल स्त्रोत, गर्मी में होगा संकट

जंगल में जस्त्रोतों, पोखरो की नहीं सफाई, झिरे नहीं खोली गई, गर्मी में कई जानवर हो जाते हैं दुर्घटना का शिकार  

Google source verification

जबलपुर. गर्मी की दस्तक के साथ ही वन्य प्राणियों के लिए भी पानी की समस्या खड़ी होने की िस्थति निर्मित होने लगी है। एक तरफ जंगल के अंदर सीमित जलस्त्रोत है जिसके कारण वन्य जीव पानी की तलाश में शहर की और भटककर आ जाते हैं। जंगल में सीमित जलस्त्रोत हैं तो कुछ सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। गर्मी आने के पहले इन जलस्त्रोतों में साफ-सफाई और पानी के प्रबंध की शुरुआत होने लगती है। लेकिन अभी इस दिशा में कोई भी ठोस प्रयास नहीं हो सके हैं। ऐसे मे अप्रैल-मई के दौरान वन्य जीवों के सामने मुश्किले खड़ी होंगी।
नहीं हुई ठोस पहल जानकारों के अनुसार गर्मी को देखते हुए वन्य प्राणियों के लिए पानी की वैकल्पिक व्यवस्था वन विभाग के माध्यम से की जाती है। बीट गार्ड, वनरक्षकों के माध्यम से पेयजल स्त्रोंतों की िस्थति का आंकलन कराया जाता है लेकिन इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई है। जंगलों में ऐसे स्थानों पर पोखर, झिर बनाकर पानी के नए जलस्त्रोत बनाने पर काम किया जाता है। साथ ही सूख रहे जलस्त्रातोंमें पानी भरने की व्यवस्था की जाती है। ताकि गर्मी बढ़ते ही वन जीवों को पानी की तलाश में भटकना न पड़े।
कई तरह के वन्य जीव शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों से जंगल लगा हुआ है। डुमना, खमरिया, बरहा, ग्वारीघाट, चरगंवा, मझौली, शहपुरा, एसएफआरआई में ऐसे ही जंगल हैं। यहां तेंदुएं से लेकर चीतल, हिरण, भालू, सांभर तक हैं। जो कि पानी की तलाश में कई बार जंगल से निकलकर सडक़ों, गांवों तक आ रहे हैं। इस बात की जानकारी आसपास के लोगों द्वारा वन विभाग बीट गार्डो को भी दी जा चुकी है।

-गर्मी में जंगल के पानी के प्राकृतिक जलस्त्रोतों को चिन्हित कराया जा रहा है। जलाशऔर पोखरों की सफाई कराने के निर्देश दिए गए हैं साथ ही बंद झिरों को भी खुलवाने के लिए कहा गया है।
-गुलाब सिंह राजपूत, डिप्टी रेंजर