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बड़ी खबर, गिरने वाला है मदन महल का किला, पड़ गईं किले में दरारें, पर्यटकों का प्रवेश किया बंद

बड़ी खबर, गिरने वाला है मदन महल का किला, पड़ गईं किले में दरारें, पर्यटकों का प्रवेश किया बंद  

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famous old forts of india

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जबलपुर। 11 वीं शताब्दी का बना रानी दुर्गावती का किला दरक गया है। इस किले के ऊपरी तल पर लोगों के जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। किले में जगह-जगह दरारें पड़ गई हैं। रखरखाव की कमी से यह किला अपनी मूल पहचान खोता जा रहा है। किले के परिसर में बना पुरातन अस्तबल, युद्ध कक्ष, प्राचीन लिपियों, गुप्त मार्ग, गलियारा जर्जर होता जा रहा है। मदनमहल की पहाड़ी पर बने किले की हकीकत बयां करती पत्रिका की रिपोर्ट...।

FECT - गिरने की कगार पर मदनमहल किले का ढांचा, उपरी मंजिल पर पर्यटकों का प्रवेश प्रतिबंधित

मदन महल का किला मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में लोकप्रिय पर्यटक आकर्षण है, जिसे दुर्गावती किले के नाम से जाना जाता हैं। मदन महल का किला एक ग्रेनाइट पत्थर पर बना है, जो उसी नाम की पहाड़ी पर करीब 515 मीटर की ऊंचाई पर है। मदन महल का किला 11 वीं शताब्दी में 37 वें गोंड शासक मदन सिंह के शासनकाल में बनाया था। मदनमहल किला को किला कहा जाता है लेकिन मूल रूप से यह एक सैन्य पोस्ट था, जिसे वॉच टॉवर और सैन्य बैरक के रूप में इस्तेमाल किया गया था।

ये है हकीकत-
किला तीन तल में बना है। पहले तल में एक कमरा और अन्य गलियारा है, जिसका प्लास्टर उखड़ रहा है। जगह-जगह दरारें पड़ चुकी हैं। जमीन से प्रथम तल तक सीढि़यां भी जर्जर हो गई हैं। दूसरे तल पर एक कक्ष और दहलान है। छोटी सी दहलान में बाउंड़ी जर्जर हो गई है। कमरे में भी दरारे हैं। इसके उपरी आखिरी तल रानी का कक्ष कहा जाता है, इस जगह पर जाने के लिए प्रवेश वर्जित कर दिया गया है। यहां मात्र १५ सीढि़यां हैं, जो रानी के कक्ष तक जाती है। इस कक्ष के सामने दहलान जर्जर हो गया है। चौकीदार किशन का कहना है कि उपरी हिस्सा जर्जर हो गया है, फर्श पर दरारें आ गई हैं, जिससे वहां लोगों को जाने नहीं दिया जा रहा है।

किले की प्रोफाइल:
किला गोंड रानी रानी दुर्गावती से और उनके बेटे मदन सिंह के साथ जुड़ा हुआ है। जो दसवें गोंड शासक थे। रानी दुर्गावती अंतत: मुगलों से लड़ते हुए शहीद हुईं थी। जबलपुर के शासकों ने जबलपुर, मंडला और आसपास के क्षेत्रों पर राज्य किया। मदन महल उनके द्वारा निर्मित एक ऐसा किला है। यद्यपि बिल्कुल वास्तुशिल्प के चमत्कार नहीं, छोटे किले को भारत में प्राचीन स्मारकों के रूप में देखा जाता है।

किले की वास्तुकला:
किले ने शासक, अस्तबल, युद्ध कक्ष, प्राचीन लिपियों, गुप्त मार्ग, गलियारों और एक छोटे से जलाशय हैं। किले के कमरों को रणनीतिक रूप से डिजाइन किया गया था।

ये कहते हैं इतिहासविद-
इतिहासविद राजकुमार गुप्ता का कहना है कि मदनमहल किला राजा मदन शाह ने बनवाया था। ये १७४०-४५ ईसवी तक मौजूद थे। यह तीन मंजिला वॉच टावर था। महल के प्रवेशद्वार के समीप एक सुरंग थी, जो जंगल के रास्ते खुलती थी। किले का रखरखाव नहीं होने से इसका ढांचा धीरे-धीरे जर्जर होता जा रहा है। रानी दुर्गावती के कक्ष तक लोगों को जाने नहीं दिया जा रहा है। द्वितीय मंजिल की छत पर दरारें है, छत दब सी गई है।

यहां हैं दरारे
प्रथम तल के कक्ष में
प्रथम तल पर गलियारे और सीढि़यों पर
द्वितीय तल की बाउंड्री और कक्ष में
द्वितीय तल के छज्जे में
तृतीय तल के फर्श और कक्ष में


किले की मरम्मत की जाती है, इसके रखरखाव के लिए प्रस्ताव मुख्यालय भेजा गया है। पुराना ढांचा हैं, इसे सुरक्षित रखने की कोशिश है। उपरी हिस्से को बंद किया गया है।
- अशोक कुमार सिन्हा, एएसआई, आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया