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MP टूरिज्म: मध्ययुग के योद्धा की कहानी सुनाता है ये अद्भुत म्यूजियम

धुबेला म्यूजियम की खजुराहो से दूरी 65 किलोमीटर है। खजुराहो से यहां तक सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है।

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Abha Sen

Apr 09, 2016

Maharaja Chhatrasal Museum

Maharaja Chhatrasal Museum

महाराजा छत्रसाल म्यूजियम (संग्रहालय), अब तक आपने मध्यप्रदेश टूरिज्म इंडस्ट्री के जितने भी स्थानों की सैर की है उनमें ये सबसे अलग और आपके लिए सबसे यादगार यात्रा हो सकती है। यह स्थान छतरपुर-नवगांव हाईवे पर धुबेला में स्थित है। महाराजा छत्रसाल की याद में इसे सितंबर 1955 में बनाया गया था। यहां गुप्त और कल्चुरि काल की यादें भी देखने मिलती हैं।


यहां बुंदेला राजाओं के वस्त्र और हथियार भी देखने मिलते हैं। पाश्र्वनाथ, ऋषभनाथ और नेमीनाथ की मूर्तियां भी यहां हैं।म्यूजियम में अलग-अलग आठ दीर्घाएं हैं। जिनमें म्यूजियम की ओपन गैलरी पर्यटकों के लिए सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र होती है।

Maharaja Chhatrasal Museum

कैसे पहुंचे
महाराजा छत्रसाल संग्रहालय धुबेला महल में स्थित है, जो छतरपुर से 17 किमी. दूरी पर छतरपुर नौगांव मार्ग पर मऊ नामक गांव से 1-6 किमी. की दूरी पर अवस्थित है। धुबेला म्यूजियम की खजुराहो से दूरी 65 किलोमीटर है। खजुराहो से यहां तक सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है। यह महल उत्तर मध्य कालीन क्षेत्रीय स्थापत्य का उत्तम नमूना है।

प्रतापी योद्धा
छत्रसाल (4 मई 1649 – 20 दिसम्बर 1731) भारत के मध्ययुग के एक प्रतापी योद्धा थे। जिन्होने मुगल शासक औरंगजेब से युद्ध करके बुन्देलखण्ड में अपना राज्य स्थापित किया और 'महाराजा' की पदवी प्राप्त की इसका निर्माणकाल 18 वीं शती ई. बताया जाता है।

मस्तानी
हाल ही में दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की फिल्म बाजीराव-मस्तानी के बाद इस ओर लोगों का ध्यान अधिक आकर्षित हुआ। इतिहासकारों के मतानुसार मस्तानी बाजीराव की पुत्री थी जिसका असली नाम कंचनी था।

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