
maihar sharda mandir real story of pujari
जबलपुर। धार्मिक स्थलों पर लाखों रुपयों का चढ़ावा आता है। माता के भक्त हों या किसी भगवान के, वे सामथ्र्य अनुसार चढ़ावा चढ़ाते हैं। वहीं पुजारी के रूप में वे देवदूत को देखते हैं। यदि ऐसे में कोई देवदूत अनियमितता करे या भक्तों से धोखा करे तो वह बर्दाश्त से बाहर है। ऐसा ही एक मामला मप्र के सबसे बड़े सिद्धपीठ मैहर का सामने आया है। जहां पुजारी पर अनियमितता का आरोप लगा है। आरोप साबित होने पर भी कार्रवाई न होने से भक्त ने हाईकोर्ट की शरण ली। जहां से आदेश होने के बाद कलेक्टर ने उसका पालन नहीं किया। अब कोर्ट ने नोटिस जारी कर कारण पूछा है। वहीं मंदिर प्रबंधन समिति में हडक़ंप मचा हुआ है।
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क्यों नहीं की मैहर मंदिर के पुजारी के खिलाफ कार्रवाई
सतना कलेक्टर मुकेश शुक्ला को हाईकोर्ट ने अवमानना नोटिस जारी कर पूछा
मप्र हाईकोर्ट ने सतना कलेक्टर मुकेश शुक्ला को शोकॉज नोटिस जारी पूछा है कि मैहर की शारदा देवी मंदिर के पुजारी देवी प्रसाद पांडे के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। जस्टिस एसके सेठ व जस्टिस राजीव दुबे की डिवीजन बेंच ने पूर्व आदेश का पालन न करने के संबंध में दायर अवमानना याचिका पर कलेक्टर से स्पष्टीकरण मांगा। कोर्ट ने 6 सप्ताह में जवाब-तलब किया।
यह है मामला-
सतना जिले के मैहर निवासी विजय कुमार श्रीवास्तव ने याचिका दायर कर कहा कि मैहर स्थित शारदा देवी मंदिर के पुजारी देवी प्रसाद पांडे के खिलाफ अनियमतता की जांच के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। कोर्ट ने 2015 में एक कमेटी का गठन कर जांच का निर्देश दिया। कमेटी की रपोर्ट में बताया गया कि मंदिर में अनियमितता की जा रही है। इसके लिए पुजारी देवी प्रसाद को भी दोषी माना गया। हाईकोर्ट ने सतना कलेक्टर को 6 माह के भीतर विधि अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया । कलेक्टर द्वारा कार्रवाई न करने पर यह अवमानना याचिका दायर की गई। प्रांरभिक सुनवाई के बाद बेंच ने सतना कलेक्टर को शोकॉज नोटिस जारी कर दिए।
Published on:
27 Oct 2018 10:18 am
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