
gall bird in jabalpur
जबलपुर. नर्मदा की लहरों पर अठखेलियां करता समुद्री पक्षी गल और देश-विदेश से आए सैलानी परिंदे पर्यटकों को खूब लुभा रहे हैं। ङ्क्षवटर सीजन की शुरुआत के साथ ही डेरा जमाने वाले ये पक्षी सीजन की विदाई के साथ ही लौटेंगे। सीजन खत्म होते ही वे समुद्र तटों का रुख करेंगे।
6 वर्षों से शहर में दे रहे दस्तक
जंगल, पहाड़ और पर्याप्त जलस्रोत के कारण पिछले 5-6 वर्षों में मेहमान पक्षियों की दस्तक शहर में बढ़ी है। नर्मदा घाटी में प्रदूषण का स्तर कम होने के कारण सैलानी परिंदों को उनका हैबीटेट मिल रहा है।
देखें जस सकते हैं विशेष प्रजाति के बर्ड्स
प्रकृति की खूबसूरती का एहसास करा रहे हैं। इनमें यूरोपियन पक्षियों के साथ ही उत्तर भारत से आने वाले पक्षी भी हैं। पेड़ों के साथ ही जलस्रोतों और खेत-खलिहानों में भी विशेष प्रजाति के बर्ड्स नजर आ रहे हैं।
जानकारों के अनुसार, सर्दी शुरू होते ही यूरोपीय देशों (उत्तर की ओर) से पक्षियों का झुंड मध्य भारत की ओर आता है। नर्मदा की अथाह जलराशि, शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जलस्रोत बचे हुए हैं, जो उनके हैबिटेट से मेल खाते हैं। फरवरी से प्रवासी पक्षियों की वापसी शुरू होगी। वे विभिन्न ठिकानों पर ठहरते हुए समुद्र तटों का रुख करेंगे।
बोटिंग एंड सेल्फी विद बर्ड्स
नर्मदा नदी में इन दिनों समुद्री पक्षी सी गुल्स का प्रवास है। ग्वारीघाट में लोग इन्हें लुभाने के लिए मुरमुरा खिलाते हैं, तो उनका झुंड चहचहाता हुआ नावों के करीब आ जाता है। बोटिंग करने वाले बर्ड्स के साथ सेल्फी लेते हैं। कुछ लोग वीडियो भी बना रहे हैं। बोटिंग नहीं करने वाले गीला आटा और मुरमुरा खिलाते हैं।
जबलपुर में प्रवासी पक्षी
यूरोप का रेड ब्रेस्टेड फ्लाई कैचर, उत्तर भारत का ब्लैक हेडेड बंटिंग, रेड हेडेड बंटिंग, कजाकिस्तान, पाकिस्तान की ओर से आने वाले वॉब्लर्स, यूरोपियन, हिमालय की तराई के वर्डेटर फ्लाई कैचर, ड्रे हेडेड केनरी फ्लाई कैचर, अल्ट्रा मरीन फ्लाई कैचर का शहर के पेड़ों पर डेरा है। भारतीय प्रवासी पक्षियों में रेड क्रेस्टेड कॉमन कोचर, टफटेड ग्रे ब्लैक गूज, गल बर्ड भी जलस्रोतों के आस-पास डेरा डाले हुए हैं। यूरोपियन ग्रेटर्स स्पॉटेड ईगल, भारतीय प्रजाति का कॉमन कैस्टल, लॉन्ग लेग बजार्ड भी देखे जा रह हैं। उत्तर भारत का स्टैफी ईगल जो राजस्थान और गुजरात में ज्यादा दिखाई देते थे, करीब तीन साल से जबलपुर का रुख कर रहे हैं।
एक्सपर्ट कमेंट
गंगा के प्रदूषण से कर रहे नर्मदा का रुख
पहले गल बर्ड उत्तर भारत की नदियों में ज्यादा पाए जाते थे। यह समुद्री पक्षी है। इसे काला सिर गंगा और भूरा सिर गंगा के नाम से भी जाना जाता है। गंगा नदी में प्रदूषण बढऩे के बाद ये तीन वर्षों से नर्मदा घाटी का रुख कर रहे हैं। इससे प्रमाणित होता है कि नर्मदा जल में ज्यादा स्वच्छता है। इसे कायम रखना चाहिए। आस्था के साथ वैज्ञानिक द़ृष्टिकोण से भी स्वच्छता आवश्यक है।
डॉ. आमिर नासिराबादी
साइबेरियन नहीं समुद्री पक्षी है गल बर्ड
नर्मदा नदी में नजर आने वाला गुल्स साइबेरियन नहीं है। यह समुद्री पक्षी है। ये पहले पहले कानपुर, इलाहाबाद में ज्यादा देखे जाते थे। नर्मदा नदी, बरगी डैम और कालीघाट में गल बर्ड की संख्या ज्यादा है। इसका कारण यहां उनके हैबीटेट में कोई हस्तक्षेप नहीं है। नमक वाले मुरमुरा की लालच में ये यहां आते हैं। जबकि, उन्हें यह खिलाना उचित नहीं है। प्राकृतिक रहवास में पक्षी अपना आहार खुद ढूढ़ लेते हैं।
डॉ. विजय सिंह यादव
Published on:
21 Jan 2019 07:23 am
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