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मेहमान परिंदो से खुशनुमा हुई मेवाड़ की आबोहवा, भटेवर के जलाशयों में पेलिकिन बर्ड का जमावड़ा

जलाशय सौंदर्यकरण एवं जागरूकता की कमी के चलते भटेवर तालाब पर कम हुई पक्षियों की तादात

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birds in menar

बर्ड फेस्टिवल

हेमन्त आमेटा/ भटेवर. इन दिनों में मेवाड़ के प्रमुख जलाशय मेहमान पक्षियों के कलरव से आबाद हैंं। उदयपुर जिले के भटेवर में आमलिया तालाब व भटेवरिया तालाब पर विदेशी मेहमान पक्षियों की कलरव एवं अठखेलियांं लोगो को लुभा रही हैंं। भटेवर के इन दोनों तालाबोंं पर माइग्रेटरी बर्ड रोजी पेलिकिन (हवासील) पक्षियों का जमावड़ा पक्षी प्रेमियों को आकर्षित कर रहा है।

भटेवर तालाब पर रोजी पेलिकिन हवासील पक्षियों की कलरव

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार ट्रांस हिमालय से आए हवासील रोजी पेलिकन पानी में तैरने वाला व हवा में उडऩे वाला बड़ा पक्षी है। मछली खाने का शौकीन हवासील समूह में रहते हुए मछली का शिकार करते हैं यह डुबकी नहीं लगाते केवल तैरते हैं इनका सफेद रंग और लंबी चोंच दूर से ही आकर्षित करती हैंं। इस पक्षी को रोजी पेलिकन के अतिरिक्त ग्रेट व्हाइट पेलिकन के नाम से भी जाना जाता है। वन्य जीव विशेषज्ञों की माने तो यह एक वजनदार व बड़े आकार का उडऩे वाला पक्षी है यह मुख्यत: साइबेरिया, पूर्वी यूरोप से आते है जहा बर्फ पडऩे के कारण हजारों किलोमीटर उड़ान भरकर प्रजनन व भोजन के लिए भारत में आते हैं। यह पक्षी प्रवास के दौरान तीन हजार किलोमीटर की ऊंचाई तक वी आकार में उडक़र समूह में मेवाड़ के जलाशयों पर पहुचते हे। भटेवर के दोनो जलाशयों पर टापू होने एवं मछलियों की भरमार होने के चलते नर और मादा पक्षियों को यहां की आबोहवा रास आने लग गई है। पक्षीविदोंं के अनुसार भटेवर के जलशयो में टापू पर पेलिकिन हवासील पक्षी प्रजनन कर अंडे देते हैंं और जलाशयों पर अठखेलियां करते हुए अपने पसंदीदा भोजन मछलियों का शिकार करते हैं इसलिए इन जलाशयों पर हवासील पक्षियों का जमावड़ा लगा हुआ है।