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संस्कारधानी में दिखेगा गोकुल का नजारा

गोकुल की गलियों का नजारा संस्कारधानी में देखने को मिलेगा। मटकी फोड़ का उत्साह भी जमेगा और उमंग की बयार भी छाएगी। मटकी फोडऩे वाले बाल-गोपालों ने कमर कस ली है। अब इंतजार है तो बस जन्माष्टमी का, ताकि मटकी फोड़ में हिस्सा लेकर गोविंद की लीला से रूबरू हो सकें।

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Abhishek Dixit

Aug 22, 2016

matki fod

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जबलपुर। गोकुल की गलियों में शोर मचेगा और बिरज के बांके भी टोलियों में निकलेंगे। गो-गो-गो गोविंदा की धुनों पर मंडलियों के गोपाल मटकी फोडेंगे। इन दिनों शहर के हर वर्ग में जन्माष्टमी की धूम देखने को मिल रही है। इसके लिए जहां लोगों की जन्माष्टमी की तैयारी है, वहीं शहर के अखाड़ों और मटकी फोडऩे वाले भी मटकी फोडऩे की प्रैक्टिस में लगे हुए हैं। शहर में इस जन्माष्टमी में छोटी और बड़ी जगहों को मिलाकर 42 जगहों में प्रतियोगिता सम्पन्न करवाई जाएगी। इसके लिए न सिर्फ शहर के अखाड़ों और मंडलियों में प्रैक्टिस शुरू कर दी गई है, वहीं अब कॉलोनी और कई मोहल्लों में भी मटकी फोड़ की प्रतियोगिताओं की तैयारी शुरू हो चुकी हैं। इसके लिए अखाड़ों के ट्रेनर्स को भी अपॉइंट किया जा रहा है, ताकि वे शहर के विभिन्न क्षेत्रों में मटकी प्रतियोगिता आयोजित करवा सकें।

स्कूलों और महिला क्लबों में भी
आजकल स्कूलों और महिला क्लबों में भी मटकी फोड़ प्रतियोगिता होती है। यहां मटकी की हाइट बहुत कम होती है। यह आयोजन बच्चों को कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व समझाने के लिए रखी जाती है।

शहर में
20 फीट तक की फोड़ी जाती है मटकी
छोटी-बड़ी जगहों को मिलाकर 42 जगहों पर होती है प्रतियोगिता
लगभग 35 लोगों से मिलकर बनती है टोली

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