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मप्र में सबसे महंगी बिजली, कारण जानकर आ जाएगा गुस्सा

मप्र में सबसे महंगी बिजली, कारण जानकर आ जाएगा गुस्सा  

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इतने बढे दाम दे रही जनता

इतने बढे दाम दे रही जनता

जबलपुर. मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कम्पनी उत्पादन गृहों के मेंटीनेंस पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च करता है। वहीं दूसरी ओर उसके प्लांट डिमांड के समय जवाब दे देते हैं। जनरेशन के उत्पादन गृहों से बिजली की डिमांड पूरी न होने पर पावर मैनेजमेंट को महंगी दरों पर निजी और दूसरे राज्यों से बिजली खरीदी करनी पड़ती है। इस अतिरिक्त राशि का भुगतान भी बिजली दरों की बढ़ोत्तरी की प्रमुख वजह है। भरपाई आम उपभोक्ताओं को महंगी बिजली देकर की जाती है।
जानकारी के अनुसार प्रदेश के ताप विद्युत गृहों को प्रतिदिन ५५ हजार यानि महीने में १६ लाख ५० हजार मीट्रिक टन कोयले की जरूरत पड़ती है। अभी ताप विद्युत गृहों को रोज ४० हजार ३३८ मीट्रिक टन ही कोयला मिल पा रहा है। इससे कई बार प्लांटों को बंद करना पड़ा। वहीं डिमांड के बावजूद आंशिक उत्पादन करना पड़ा।

ये है वजह- जनरेटिंग कम्पनी के तहत आने वाले विद्युत उत्पादन गृहों का हाल, तकनीकी खामियों की भरमार के खामियाजे से उपभोक्ताओं पर पड़ रही महंगी बिजली की मार

टेक्निकल डायरेक्टर का मैनेजमेंट फेल
जनरेशन कम्पनी में उत्पादन गृहों के ऑपरेशन, मेंटीनेंस और कोयले के प्रबंधन के लिए ही टेक्निकल डायरेक्टर का पद सृजित किया गया है। इसके बावजूद उत्पादन गृहों में बायलर, टरबाइन, इलेक्ट्रिकल, कोयले की कमी के चलते १३१ बाद प्लांट बंद करने पड़े। एेसे में आनन-फानन में दूसरे राज्यों से महंगी बिजली खरीदनी पड़ी।

इस तरह तकनीकी खामियों से बंद हुए प्लांट
- अमरकंटक ताप विद्युत गृह की पांच नम्बर यूनिट बायलर, इलेक्ट्रिकल में तकनीकी खामी के चलते दो-दो बार बंद हुई
- सतपुड़ा की २१० मेगावाट वाली आठ नम्बर की यूनिट मेंटीनेंस के बाद भी बायलर में चार और इलेक्ट्रिकल में तीन बार खामी आने के चलते बंद रही।
- सतपुड़ा की नौ नम्बर की यूनिट बायलर और टरबाइन में खराबी के चलते एक-एक बार बंद हुईं।
- सतपुड़ा में २५०-२५० मेगावाट वाली दोनों नई इकाई १९ बार बायलर में और छह बार इलेक्ट्रिकल में तकनीकी खामी के चलते बंद हुईं।
- संजय गांधी ताप विद्युत गृह की यूनिट क्रमांक एक बायलर में १२ तो इलेक्ट्रिकल में पांच और कोयले की कमी के चलते एक बार बंद हुई।
- संजय गांधी की दो नम्बर की यूनिट १० बार बायलर, तीन बार इलेक्ट्रिकल के चलते बंद रही।
- संजय गांधी की ५०० मेगावाट वाली पांच नम्बर की यूनिट मेंटीनेंस के बाद भी १३ बार बायलर और चार बार इलेक्ट्रिकल खामी के चलते बंद रही।
- श्री सिंगाजी की ६००-६०० मेगावाट की दोनों नई ईकाईयां मेंटीनेंस के बाद भी ८ बार बायलर और छह बार इलेक्ट्रिकल व दो बार कोयले की कमी के चलते बंद रहीं।

यह है स्थिति
- उत्पादन गृहों को रोज कोयले की जरूरत-५५ हजार मीट्रिक टन
- जरूरत के समय मिला- ४० हजार मीट्रिक टन
- एक साल में बंद हुए प्लांट-१५३ बार
- तकनीकी खामी से बंद हुए प्लांट-१३१ बार
- मेंटीनेंस के चलते बंद हुए प्लांट-०९ बार
- डिमांड न होने के चलते बंद हुए प्लांट-१३ बार