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MP Election 2023: भाजपा ने तीन विधायकों पर फिर भरोसा जताया, सिहोरा में सस्पेंस, कई मांग रहे उत्तर

महाकौशल में 38 में से 26 सीटों के चेहरे तय, पार्टी अब जोखिम लेने को नहीं तैयार, कटनी, नरसिंहपुर में एक-एक सीट बचीं, सरकार को आइना दिखाने वाले अजय फिर पाटन से लड़ेंगे...  

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भाजपा ने हारी सीटों पर बड़े फेरबदल के बाद अब जीती सीटों पर मौजूदा विधायकों पर ही भरोसा जताया है। जबलपुर से कटनी तक बहोरीबंद और सिहोरा को छोडकऱ पांच विधायकों को 2023 विधानसभा सीट की टिकट थमा दी है। अब जबलपुर में दो और कटनी-नरसिंहपुर की एक-एक सीट पर ही सस्पेंस बचा है। वहीं, महाकोशल की 38 सीटों में से 26 पर चेहरे घोषित कर दिए गए हैं। 12 सीटें अभी प्रतीक्षा सूची में हैं।

महाकौशल ही ऐसा क्षेत्र है, जिसकी भाजपा की चार किस्तों में जारी हुई सूची में हर बार प्रत्याशी तय हुए हैं। सोमवार को आई चौथी सूची में बड़ा दांव चलते हुए विधायकों को ही फिर से मैदान में उतार दिया है। कैंट से अशोक रोहाणी, पाटन से अजय विश्नोई और पनागर से सुशील कुमार तिवारी ही पार्टी का चेहरा हैं। वहीं, कटनी में विजराघवगढ़ से संजय पाठक, कटनी मुड़वारा से संदीप जायसवाल को बदलने का जोखिम पार्टी ने नहीं उठाया। मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज विश्नोई जब तब पार्टी को आइना दिखाते रहे हैं, लेकिन पार्टी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखाने का जोखिम मोल नहीं लिया। जबलपुर जिले की एक और जीती सीट सिहोरा पर अभी सस्पेंस बना हुआ है। वहां नंदनी मरावी विधायक हैं। तो कटनी के बहोरीबंद के विधायक प्रणय पाण्डेय पर भी फैसला नहीं हुआ है। नरसिंहपुर में केवल हारी सीट तेंदूखेड़ा भर ही बची है। चार, कटनी में एक और नरसिंहपुर में पार्टी के तीन विधायक हैं। लेकिन इन आठ सीटों पर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसके उलट भाजपा ने इन तीन जिलों की 16 में से 12 पर चेहरे तय कर दिए हैं।

उत्तर नहीं आसान

सबसे अधिक दावेदारों वाली सीट जबलपुर पश्चिम में सांसद राकेश सिंह को उतारकर सबके अरमान उतार दिए। लेकिन उसके लिए उत्तर सीट पर फैसला आसान नहीं है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शुरूआत भाजपा ने हारी सीटों से ही किया था, पर तब भी इस पर निर्णय नहीं हो पाया। यहां से पूर्व मंत्री शरद जैन, धीरज पटेरिया, वेदप्रकाश सहित दावेदारों की पूरी कतार है। तो सिहोरा सीट पर मौजूदा विधायक को लेकर पार्टी असमंजस में है।

कांग्रेस पर बढ़ा दबाव

भाजपा की चौथी सूची आने के बाद कांग्रेस पर दबाव बढ़ा है। आलम यह है कि जीती सीटों पर ही पार्टी फैसला नहीं कर पा रही है। जबलपुर में चार, कटनी में एक और नरसिंहपुर में पार्टी के तीन विधायक हैं। लेकिन इन आठ सीटों पर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसके उलट भाजपा ने इन तीन जिलों की 16 में से 12 पर चेहरे तय कर दिए हैं।

कांग्रेस अभी असंतोष की थाह ले रही

अगर कटनी जिले को छोड़ दें तो महाकोशल के बाकी जिलों में भाजपा में वैसी बगावत नहीं देखने को मिली है। खासतौर से टिकट वितरण को लेकर मनमुटाव चाहे भले हो पर सडक़ पर असंतोष नहीं आया है। कांग्रेस भी ऐसा ही माहौल चाहती है, इसलिए टिकट वितरण के बाद पैदा होने वाले संभावित असंतोष की थाह ले रही है।

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