
skelton of elephant
जबलपुर। जंगली हाथियों को मप्र का वनक्षेत्र पसंद आ गया है। राज्य के जंगल में जंगली हाथी भी दर्ज हो गए हैं। छत्तीसगढ़ ओडिशा की ओर से आने वाले हाथियों का झुंड एक-दो माह बाद लौट जाता था, लेकिन एक वर्ष से इन हाथियों की झुंड बांधवगढ़ नेशनल पार्क एवं आसपास के क्षेत्रों में है। इन हाथियों की बदौलत मप्र प्रोजेक्ट टाइगर में अव्वल रहने के बाद प्रोजेक्ट एलीफैंट का दावेदार हो गया है। जंगली हाथियों के लिए कॉरिडोर विकसित करने सहित अन्य कार्य करने की आवश्यकता हो गई है।
परिवार की तरह झुंड में रहने वाले हाथियों को पकडऩा या भगाने की कोशिश करना मुश्किल काम है। छत्तीसगढ़ में झारखंड और ओडिशा से हाथियों का झुंड पहुंचता है। हो सकता है कि वहां के जंगल में कैरिंग कैपिसिटी कम होने पर हाथियों का कुनबा मप्र की ओर बढ़ा होगा। बांधवगढ़ नेशनल पार्क के डायरेक्टर विसेंट रहीम के अनुसार वर्ष 2018-19 में प्रोजेक्ट एलीफैंट के अंतर्गत मप्र को कुछ बजट मिला था। दो वर्षों से प्रोजेक्ट एलीफैंट से बजट की मांग की जा रही है।
सीखेंगे जंगली हाथी के साथ जीने का तरीका
वन अधिकारियों के अनुसार जंगली हाथियों के बारे में सूचना तंत्र बेहतर किया जाएगा। जैसे भी कोई झुंड किसी ओर आगे बढ़ेगा, सम्बंधित क्षेत्र के कर्मचारियों को सूचना दी जाएगी, कर्मचारी ग्रामीणों को अलर्ट करेंगे। जंगली हाथियों की संख्या अधिक वाले क्षेत्रों के विशेषज्ञों से यहां के अमले को प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।
तीन झुंड हैं मप्र में
बांधवगढ़ नेशनल पार्क -42
मंडला - 2
संजय टाइगर रिजर्व-7
डिंडोरी- 11 (वापस चले गए )
वन्य प्राणी मप्र के एपीसीसीएफ जेएस चौहान ने बताया कि जंगली हाथियों के तीन झुंड मप्र के जंगलों में हैं। जबकि, 11 हाथियों का एक झुंड छत्तीसगढ़ वापस चला गया है। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद हाथी मित्रों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। अब जंगली हाथी स्थायी रूप से राज्य में रहने लगे हैं। प्रोजेक्ट एलीफैंट को प्रस्ताव भेजा गया है।
Published on:
16 Apr 2020 11:54 pm
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