10 जून 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

रिटायर्ड जजों के पेंशन की फाइल रोकना पीएस को महंगा पड़ा, हाईकोर्ट ने सुनाया ये फैसला

लेबर कोर्ट के रिटायर्ड जजों की पेंशन निर्धारण का मसला

2 min read
Google source verification
mp high court

mp high court

जबलपुर। रिटायर्ड जजों के पेंशन से जुड़ी एक फाइल को रोकना श्रम विभाग के प्रमुख सचिव को महंगा पड़ गया। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने श्रम न्यायालयों के रिटायर्ड न्यायाधीशों की पेंशन निर्धारण के इस मसले पर श्रम विभाग के अधिकारियों के रवैए को आड़े हाथ लिया है। चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने श्रम विभाग पीएस अश्विनी राय को 16 अप्रैल की दोपहर 2.30 बजे कोर्ट में उपस्थित रहने के लिए कहा है। उन्हें यह बताने के लिए कहा गया है कि हाईकोर्ट द्वारा इस सम्बंध में दिए गए प्रस्ताव का क्या हुआ?

यह है मामला
अरेरा कॉलोनी भोपाल निवासी सतीश श्रीवास्तव सहित अन्य ने याचिका दायर कर कहा है कि याचिकाकर्ता लेबर कोर्ट में पीठासीन अधिकारी रह चुके हैं। रिटायरमेंट के बाद उनकी पेंशन का नियमों के अनुसार निर्धारण नहीं किया जा रहा है। राज्य सरकार की ओर से पूर्व में बताया गया था कि सरकार ने लेबर कोर्ट के रिटायर्ड जजों की पेंशन निर्धारण के लिए नियम बनाए हैं। इस पर हाईकोर्ट ने कहा था कि निचली अदालतों के रिटायर्ड जजों की पेंशन निर्धारण के लिए हाईकोर्ट के नियम पहले से ही बने हुए हैं। सरकार को नए नियम बनाने की बजाय इन्ही नियमों में संशोधन कर इसे लेबर कोर्ट के रिटायर्ड जजों के लिए लागू करना चाहिए।

पीएस के यहां पेंडिंग है फाइल
बुधवार को कोर्ट को बताया गया कि यह प्रस्ताव श्रम विभाग के प्रमुख सचिव को आवश्यक कार्यवाही के लिए भेजा गया था। इसकी फाइल उनके पास ही लम्बित है। इस पर कोर्ट ने जमकर नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि पीएस को हाईकोर्ट के प्रस्ताव पर विचार कर अपनी राय सहित आगे चैनल में बढ़ाना चाहिए था, ताकि इसे कैबिनेट से मंजूरी दिलाने के लिए जल्द से जल्द कदम उठाए जा सकें। नाराजगी जाहिर करते हुए कोर्ट ने कहा कि यह फाइल अब तक लम्बित क्यों है, इस प्रश्न का जवाब अब प्रमुख सचिव को ही कोर्ट में आकर देना होगा। याचिकाकर्ता का पक्ष विशाल भिडे़ व राज्य सरकार का पक्ष अतिरिक्त महाधिवक्ता समदर्शी तिवारी ने रखा।