
Medical University
जबलपुर। मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय एमबीबीएस और एमडी कर चुके छात्र-छात्राओं के लिए विशेष सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने जा रहा है। तकरीबन 6 माह के इन सर्टिफिकेट कोर्स में डीएम कोर्स की पढ़ाई में जाने वाली विषय-सामग्री के अलावा विभिन्न जांचों की जानकारी से अपग्रेड किया जाएगा। इसमें ईसीजी, ईको, कलर डॉल्लर जैसी जांचें शामिल है। यूनिवर्सिटी ने नए कोर्सेज को सत्र 2018-19 से लागू करने की तैयारी तकरीबन पूरी कर ली है। इसका जल्द ही नोटिफिकेशन जारी होने की संभावना है।
इसलिए शुरू किए कोर्स
एमबीबीएस या एमडी करने के बाद प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों को कुछ जांचों में समस्या रहती है। इसमें प्रमुख रुप से ईको, कलर डॉप्लर, एंडोस्कोपी सहित अन्य जांच विधियां शामिल है। इनकी सटीक गणना में कई डॉक्टरों को परेशानी होती है। इससे मरीज के उपचार में परेशानी होती है। डॉक्टरों की यहीं परेशानी को समझते हुए मेडिकल यूनिवर्सिटी ने शार्ट टम्र्स सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने का निर्णय किया है। इससे एमबीबीएस और एमडी कर चुके छात्रों को विभिन्न जांचों की सटीक गणना विधि की जानकारी सुनिश्चित होगी।
हर छात्र एमडी नहीं करता
एमयू के कुलपति डॉ. आरएस शर्मा के अनुसार कॉलेजों एमसीआई के सिलेबस के मुताबिक जो पढ़ाई हो रही है वह डीएम में होती है। हर छात्र एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद एमडी के लिए सिलेक्ट नहीं हो पाता है। ऐसे में एमडी के बाद डीएम कोर्स के लिए छात्रों की संख्या कम हो जाती है। रोगों की जांच की नई पद्धाति में आधुनिक मशीनों से होने वाली जांचों का महत्व बढ़ा है। इसलिए इन उपकरणों के संचालन की विधि के साथ ही छात्र सटीक गणना कर रोगी का उचित उपचार कर सकें, नए शॉर्ट टम्र्स कोर्सेज शुरू किए जा रहे है।
प्रेक्टिकल की सुविधा नहीं
कुलपति के अनुसार स्पेशलाइजेशन कोर्स में शामिल होने के कारण इन मशीनी जांचों का बारीक अध्ययन डीएम की पढ़ाई में होता है। एमबीबीएस की पढ़ाई में एक-दो पीरियड ही होते हैं। प्रैक्टिकल की सुविधा भी नहीं है। एमयू द्वारा संचालित किए जाने वाले 6 महीने के सर्टिफिकेट कोर्स के बाद डॉक्टर जांचों का सही अध्ययन करने में सक्षम बनेंगे।
कर्नाटक में है ऐसे कोर्स
कुलपति ने बताया कि 6 महीने के शॉर्ट टम्र्स कोर्सेज शुरू करने के लिए संबद्ध कॉलेजों को ही मान्यता जारी की जाएगी। पाठ्यक्रम संचालन के इच्छुक कॉलेजों को एमयू को आवेदन करना होगा। इसके बाद एमयू की टीम नए पाठ्यक्रम के लिए आवश्यक उपकरणेां और संसाधनों की कॉलेज में जाकर जांच करेगी। जांच के बाद उन्हें पाठ्यक्रम शुरू करने की अनुमति मिलेगी। इनकी परीक्षाओं का आयोजन एमयू ही करेगा। अभी तक ऐसे पाठ्यक्रम कर्नाटक सहित कुछ चुनिंदा राज्यों में ही है। प्रदेश में शुरुआत से इच्छुक छात्रों को कोर्स करने के लिए दूसरे राज्यों तक नहीं दौडऩा पड़ेगा।
Published on:
26 Mar 2018 01:48 pm
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