
Sarni power plant Betul
ताप विद्युत गृह सारणी बैतूल और चचाई अनूपपुर में 500 मेगावॉट के सोलर पॉवर प्लांट लगाए जाएंगे। कम्पनी ने 115 मेगावॉट सोलर प्लांट के लिए टेंडर भी जारी कर दिए हैं। इससे करोड़ों की बचत का अनुमान है।
बता दें, केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए यह अनिवार्य किया है कि अब जो भी कोयला आधारित पॉवर प्लांट लगेंगे, उसका 40 प्रतिशत हिस्सा अक्षय ऊर्जा का होगा। इसी के तहत मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कम्पनी बूढ़ी हो चुकी रिटायर इकाईयों की जगह 1300 मेगावॉट की क्षमता की कोयला आधारित दो इकाईयां सारणी और चचाई में 660-660 मेगावॉट की लगाने की तैयारी कर रही है। इसी के साथ इन्हीं दोनों विद्युत उत्पादन गृह में 250-250 यानी की 500 मेगावॉट के सोलर पॉवर प्लांट लगाने जा रही है। इससे प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी। वहीं, महंगे पड़ रहे इन कोयला संयंत्रों को अक्षय ऊर्जा में बदलने से जहां उपभोक्ताओं को इसका फायदा पहुंचेगा और उन्हें सस्ती बिजली मिल पाएगी। वहीं इससे बिजली वितरण कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन में भी सुधार आएगा। साथ ही साथ मध्यप्रदेश को अपने अक्षय ऊर्जा लक्ष्यों को भी हासिल करने में मदद मिलेगी।
सात यूनिट की विदाई
पॉवर जनरेटिंग कम्पनी अब तक साढ़े पांच सौ मेगावॉट क्षमता से अधिक की सात यूनिट की विदाई कर चुकी है। चचाई अनूपपुर की दो यूनिट से 2015 से उत्पादन बंद है तो सारणी बैतूल की पांच इकाईयों को रिटायर किया जा चुका हैं। इन्हीं का स्थान 1300 मेगावॉट क्षमता का नया ताप विद्युत गृह और 500 मेगावॉट का सोलर प्लांट लेने जा रहा है।
40 साल होती है उम्र
ताप विद्युत प्लांट की उम्र 40 साल मानी जाती है, इनके बाद रिटायरमेंट की तैयारी शुरू हो जाती है। मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कम्पनी ने चाहे भले अभी सात यूनिट को ही रिटायर किया हो पर प्रदेश में दो पॉवर प्रोजेक्ट की सात से अधिक इकाईयां ऐसी हैं, जो बूढ़ी हो चुकी हैं। इनमें चचाई की 1979 से 1984 के बीच स्थापित चार और बिरसिंहपुर उमरिया की 1993 से 1999 के बीच लगाई गई तीन इकाईयां शामिल हैं। इन्हें भी आने वाले समय में रिटायर करना पड़ेगा।
करोड़ों की होगी बचत
अक्षय ऊर्जा में शिफ्ट होने से बिजली कम्पनी को साल में करोड़ों रुपए की बचत होगी। सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता राजेंद्र अग्रवाल की माने तो 500 मेगावॉट बिजली संयत्र को चलाने में एक घंटे में साढ़े तीन सौ टन कोयले को जलाने की जरूरत होती है। जो एक महीने का आंकड़ा ढाई लाख टन से अधिक का बैठता है। हालांकि अभी ग्रिड आधारित सोलर प्लांट ही लगेंगे, जो केवल दिन में सूर्य की रोशनी के दौरान ही बिजली उत्पादन कर सकेंगे।
वर्जन
सारणी और चचाई की रिटायर हो चुकी इकाईयों की जगह 1300 मेगावाट थर्मल प्लांट लगाए जा रहे हैं। इसी अनुपात में 500 मेगावॉट के सोलर प्लांट भी लगाए जाएंगे। 115 मेगावॉट के लिए टेंडर भी बुला लिए गए हैं।
मंजीत सिंह, एमडी एमपी पॉवर जनरेटिंग कम्पनी
Published on:
31 May 2023 11:42 pm
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