
muharram matam video live at jabalpur
जबलपुर। बच्चे हों या बड़े जरा सी सुई भी चुभ जाती है तो आवाज निकल आती है। लेकिन जबलपुर में मोहर्रम की दसवीं तारीख को हर साल ऐसा मंजर दिखाई देता है, जब घायल सीना और पीठ से खून टपकता रहता है, सडक़ लाल हो जाती है, किंतु किसी के चीखने की आवाज कहीं से नहीं आती, बल्कि इबादत से सिर ऊंचा हो जाता है। वे अल्लाह की याद में खुद को खंजर मारते हुए आगे बढ़ते रहते हैं। हम बात कर रहे हैं सिया समुदाय के मातमी जुलूस की। जहां मातम के तौर पर युवा अपने आप को खंजरों से घायल कर लेते हैं। सीने में जोर जोर से हाथ मारकर वे हुसैन के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।
रोंगटे खड़े करना वाला नजारा
या हुसैन या हुसैन... के नारों के साथ कोतवाली थाना के सामने काले लिबास में सैकड़ों की संख्या में युवा व वृद्ध और बच्चे एकत्रित हुए। पहले मौलाना ने तकरीर पेश की ईमान और इंसानियत का संदेश दिया। इसके बाद करबला की याद करते हुए नन्हे मुन्ने बच्चों ने जंजीरों में बंधे खंजरों से अपनी छाती और पीठ लहूलुहान कर ली। बच्चों की अधिकतम उम्र महज11 से 12 साल ही थी। सबसे छोटा बच्चा 6 साल का नजर आया। जो जंजीर से बंधे खंजर को बिना किसी चिंता या भय के अपनी पीठ पर मार रहा था। बाबा जैदी के अनुसार ये आस्था और विश्वास का पर्व है। हम हुसैन के प्रति अपनी आस्था प्रकट कर दुनिया को आतंकवाद से दूर होकर खुदा की इबादत करने का संदेश देते हैं। लोगों को समझना होगा कि यजी़द की राह पर चलने से खुदा का साया नसीब नहीं होगा। हुसैन के कदमों में इंसानियत और नेकी की राह ले जा सकती है। खंजरों से मातम की प्रथा सदियों पुरानी है। जो पूरी दुनिया में निभाई जाती है।
Updated on:
21 Sept 2018 01:26 pm
Published on:
21 Sept 2018 01:15 pm
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