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जबलपुर। नगर निगम मुख्यालय से जोन कार्यालयों को ट्रांसफर की गई नक्शा पास करने की व्यवस्था बेपटरी हो गई है। जिम्मेदारों ने 24 घंटे में नक्शा पास करने का दावा किया था, लेकिन हकीकत एकदम उलट है। आलम यह है कि 60 दिन बाद भी नक्शा स्वीकृत नहीं हो पा रहा है। प्रतिदिन 100 से अधिक लोग नगर निगम के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। सूत्रों के अनुसार भवन नक्शा स्वीकृति के लिए लम्बित आवेदनों की संख्या दो हजार से अधिक हो गई है। जबकि नगरीय प्रशासन ने 28 नवम्बर तक हर हाल में लम्बित आवेदनों का निराकरण करने का आदेश जारी किया था।
दूसरे विभागों के काम का दबाव
सूत्रों की मानें तो जोन कार्यालयों में भवन स्वीकृति का कार्य देखने वाले उपयंत्री और सहायक यंत्रियों पर पीडब्ल्यूडी सहित अन्य विभागों के काम का भी जिम्मा है। इससे वे भवन स्वीकृति के कार्यों को समय नहीं दे पाते। आवेदन करने के बाद साइट विजिट में ही 20-25 दिन लग जाते हैं।
इनमें सुधार की मांग
ऑटोमेटेड बिल्डिंग एप्रूवल सिस्टटम (एबीपीएएस-1) की समय सीमा का निर्धारण न कर अनुभवी सब इंजीनियर्स से फाइल की जांच कराई जाए।
एबीपीएएस 2 की कमियों को दूर करने के बाद एबीपीएएस 1 के स्थान पर लागू किया जाए।
नक्शा स्वीकृत करने वाले सब इंजीनियर्स को प्रशिक्षित किया जाए
सब इंजीनियर्स को मास्टर प्लान, भूमि विकास नियम और नए सर्कुलर की जानकारी दी जाए।
नक्शा स्वीकृति के लिए अलग से सब इंजीनियर की नियुक्ति हो।
नक्शे से संबंधित शिकायतों और निराकरण के लिए अलग से सक्षम अधिकारी नियुक्त किए जाएं।
सम्भाग कार्यालयों में स्टाफ की कमी और सब इंजीनियर्स पर काम का दबाव होने से लम्बित प्रकरणों की संख्या बढ़ रही है। लम्बित आवेदनों के जल्द निराकरण के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।
बाहुबली जैन, नोडल अधिकारी, नक्शा शाखा, नगर निगम
Published on:
29 Nov 2019 07:22 pm
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