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मप्र के इस हॉस्पिटल में प्रसूताओं को दी जाती है ‘जादू की झप्पी’

मुन्ना भाई एमबीबीएस की सीख काम आई मिला राष्ट्रीय प्लेटिनम बैज अवॉर्ड  

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munna bhai mbbs 3

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जबलपुर. चर्चित हिन्दी फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस परीक्षाओं के फर्जीवाड़े के लिए चाहे भले ही जुमले के रूप में इस्तेमाल की जाती हो, लेकिन इसके कथानक ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज की छवि बदल दी है। गॉयनिक विभाग में प्रसूताओं को मिलने वाली जादू की झप्पी दवा की तरह काम कर रही है। मां और दाई की तरह स्टाफ की ओर से की जाने वाली देखभाल से प्रसूताओं और उनके परिचारकों की संतुष्टि का औसत आसमान पर है। इसी के चलते मेडिकल अस्पताल ने 94 का स्कोर कर राष्ट्रीय प्लेटिनम बैज अवॉर्ड हासिल किया है।

मेडिकल अस्पताल का गॉयनिक विभाग
900 से 1 हजार डिलेवरी औसतन होती हैं हर महीने
65% सामान्य डिलेवरी
35%सिजेरियन डिलवेरी
250 मरीज आते हैं औसतन

यह उपलब्धि गॉयनिक विभाग में कई स्तरों पर हुए प्रयास और संतुष्टि के स्तर को ध्यान में रखने से मिली है। डॉक्टरों के अनुसार प्रसूता को सब कुछ ठीक होने का भरोसा देना, उसे मां जैसी जादू की झप्पी देना, एम्बुलेंस आते ही तत्काल मरीज की देखभाल, डॉक्टर के बेहतर व्यवहार, बॉयो मेडिकल वेस्ट का प्रबंधन, दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक, न्यू बॉर्न बेबी की अच्छी देखभाल जैसे पहलुओं पर नजर रखी गई।


गॉयनिक विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. कविता एन. सिंह ने बताया कि प्रसूता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने से लेकर ब्रेस्ट फीडिंग का सही तरीका बताने, परिजनों की संतुष्टि और विभाग की कमियों को दूर करने पर लगातार काम किया गया। महाकोशल अंचल का सबसे बड़ा रेफरल सेंटर होने के कारण यहां गॉयनिक विभाग पर जबर्दस्त दबाव है। वार्ड में बिस्तर कम पड़ जाते हैं, नर्सिंग और स्टाफ की कमी है। फिर भी कोशिश में कमी नहीं छोड़ी गई।

6 लाख की प्रोत्साहन राशि मिली

विभाग के प्रसूति गृह को 94 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रसूति गृह की गुणवत्ता के मानक लक्ष्य प्रोग्राम के अंतर्गत विभाग को बेहतर कार्य के लिए 6 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। विभागाध्यक्ष डॉ. कविता एन सिंह ने बताया कि इस लक्ष्य को लेकर पूरी टीम लम्बे समय से काम कर रही थी।