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शिव मंदिर की इन देवियों से डरकर भागा था औरंगजेब,ये आज भी दे रही हैं पहरा

विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भेड़ाघाट में स्थित 64 योगिनी का अनूठा मंदिर, स्थापित है विश्व की अनूठी शिव प्रतिमा

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Lalit Kumar Kosta

Jul 30, 2017

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जबलपुर। भारत का अतीत और इतिहास गौरवशाली रहा है। सदियों पुरानी यहां की शिल्पकला आज भी लोगों को आश्चर्य में डाल देती है। भेड़ाघाट स्थित चौसठयोगिनी मंदिर का शिल्प भी इन्हीं में एक है। यहां विभिन्न भाव-भंगिमाओं में 64 योगिनियां आज भी शिव-पार्वती को पहरा देती नजर आती हैं। मंदिर का निर्माण कल्चुरि काल में 950 से 955 ईश्वी के बीच युवराज देव प्रथम के शासनकाल में हुआ था। किंवदंति है कि मुगलकाल में जब औरंगजेब और उसकी सेना इस मंदिर में पहुंची। मूर्तियों को खंडित करना शुरू किया तो योगिनियों ने विकराल रूप दिखाया, जिससे औरंगजेब व उसकी सेना भाग खड़ी हुई। हालांकि इतिहासकार भी इन प्रतिमाओं के खंडित होने का रहस्य नहीं सुलझा पाए हैं। वहीं औरंगजेब के हमले के बाद यहां की महत्ता और भी बढ़ गई। ये योगनियां तंत्र विद्या की सबसे सरल माध्यम मानी जाती हैं। खासकर बुंदेलखंड और महाकोशल क्षेत्र में इनकी पूजा विशेष रूप से की जाती है।



तंत्र साधना में योगिनियां विशेष महत्व रखती हैं। योगिनियां शक्ति की परिचारिकाएं मानी जाती हैं। तांत्रिक अपनी तंत्र साधना के लिए इन्हीं योगिनियों को सिद्ध करके उनसे वांछित काम करवाते हैं। इन योगनियों की मूर्तियां आज भी देखने पर अति प्रभावशाली प्रतीत होती हैं। भेड़ाघाट स्थित इस चौसठ योगिनी मंदिर का निर्माण 10 वीं सदी में हुआ था। जिसे त्रिपुरी के कल्चुरि शासक युवराजदेव प्रथम ने अपने राज्य विस्तार के लिए योगिनियों का आशीर्वाद लेने बनवाया था। त्रिभुजी कोण संरचना पर आधारित इस मंदिर में अब भग्नवाशेष ही शेष रह गए हैं।


नाम 64 योगिनी, प्रतिमाएं 81
योगिनी पूजा परम्परा पर निर्मित इस मंदिर में योगिनियों की प्रतिमाएं 64 नहीं बल्कि 81 हैं। वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. आरके शर्मा ने मंदिर के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि यह मंदिर त्रिभुजाकार 81 कोणों पर आधारित संरचना है, जिसके प्रत्येक कोण पर योगिनी की स्थापना की गई थी। इसी स्थान पर गुप्त काल में सप्त या अष्ट मातृकाएं स्थापित थीं। 12 वीं शताब्दी में गुजरात की रानी गोसलदेवी, जो शैव थीं, ने यहां गौरीशंकर मंदिर बनवाया।




कोई प्रमाण नहीं मिले
चौसठ योगिनी मंदिर के केन्द्र में भगवान शंकर और पार्वती की विवाह प्रतिमा स्थापित है। वहीं मंदिर के चारों ओर 84 स्तंभों पर वृत्ताकार दालान बनी है। जिसमें दो प्रवेश द्वारहैं। यह मंदिर नर्मदा और बाणगंगा के संगम पर स्थित 50 फीट ऊंची पहाड़ी पर बनाया गया था। वर्तमान स्वरूप में योगिनियों की खंडित प्रतिमाएं स्थापित हैं। जिनके इस अवस्था में पहुंचने के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। भेड़ाघाट आने वाले टूरिस्टों के लिए ये विशेष आकर्षण और रिसर्च का विषय हैं।