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इस नदी के तट पर तप करते हैं मणिधारी नाग, यहां है मणिनागेश्वर शिवलिंग 

लेकिन शायद ही आपको पता होगा कि नर्मदा के तट पर ही मणिधारी नाग तप करते हैं। आज हम आपको रोचक तथ्यों के साथ एक ऐसे ही स्थान पर लेकर जा रहे हैं...

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Abha Sen

Jan 02, 2017

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जबलपुर। मां नर्मदा के तट पर सभी देव मौजूद रहते हैं। यहां गुप्त तप किए जाते हैं साथ ही अनेक साधु-संत यहां सिद्धियां प्राप्त करने आते हैं। नर्मदेश्वर शिवलिंग के लिए नर्मदा की महिमा छिपी नही है, लेकिन शायद ही आपको पता होगा कि नर्मदा के तट पर ही मणिधारी नाग तप करते हैं। आज हम आपको रोचक तथ्यों के साथ एक ऐसे ही स्थान पर लेकर जा रहे हैं...


-मणिधारक नाग नर्मदा के त्रिपुरतीर्थ उत्तर व दक्षिण तट पर ही रहते हैं। इसका उल्लेख स्कंद पुराण के रेवाखंड में किया गया है। प्राचीन शिवलिंगों के रहस्य में मणिनागेश्वर शिवलिंग की बहुत महिमा है। जो जबलपुर शहर के नर्मदा के तट पर स्थित है।

-यह शिवलिंग मणिधारक नाग ने शिव उपासना के दौरान स्थापित किया था। माना जाता है कि मणिनाग ने मां के क्रोध, अग्नि से बचने के लिए उत्तर तट पर शिव उपासना की और जगत के कल्याण के लिए शिव आज्ञा से शिवलिंग स्थापित किया। तभी से इस शिवलिंग का नाम मणिनागेश्वर प्रचलित हुआ।


-मणिनागेश्वर में पंचमुखी नाग की प्रतिमा विराजामान है। यह प्रतिमा कल्चुरिकालीन है।


-माना जाता है कि इस लिंग के पूजन से कालसर्प योग से मुक्ति मिलती है। इसका उल्लेख नंदी गीता व स्कंद पुराण के नर्मदा खंड में आया है।


-नागमणि अन्य म‌णियों से अध‌िक प्रभावशाली और अलौक‌िक होती है। यह मोर के कंठ के समान और अग्रि के समान चमकीली नजर आती है।

-नागमणि अथवा सर्प मणि का उल्लेख विभिन्न पौराणिक और लोक कथाओं में मिलता है। लोगों के बीच नागमणि को लेकर तरह-तरह के विश्वास हैं।

-ज्योतषि शास्त्र के एक प्रमुख ग्रंथ वृहत्संहति में जो उल्लेख मिलता है उसके अनुसार संसार में मणिधारी नाग मौजूद हैं।

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-ऐसी मान्यता है कि नागमणि कुछ विशिष्ट सर्प की प्रजातियों में पाई जाती है। वह कुछ विशिष्ट अवसरों या मुहूर्त पर इसे अपने शरीर से बाहर निकालते हैं।

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