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GLOBAL ALERT: “मेज़ पर रहो वरना शिकार बन जाओगे” कनाडा की ट्रंप को धमकी, भारत के लिए भी बड़ा सबक!

Middle Powers Warning:कनाडाई पीएम मार्क कार्नी ने दावोस में महाशक्तियों की दादागिरी पर कड़ा प्रहार किया है। जानिए क्यों उन्होंने कहा कि मेज़ पर न होने वाले देश 'मेनू' का हिस्सा बन जाएंगे।

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भारत

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MI Zahir

Jan 21, 2026

Mark Carney Davos 2026

दावोस 2026 में संबोधित करते कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी। ( फोटो: ANI)

Rule-based Order: दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF 2026) में कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney Davos speech 2026) का ललकारता संबोधन किसी धमकी भरी चेतावनी से कम नहीं रहा। उन्होंने दुनिया की "मध्यम शक्तियों" (Global Middle Powers strategy) को आगाह किया कि यदि वे वैश्विक निर्णयों की मेज़ पर सक्रिय नहीं रहे, तो वे शक्तिशाली देशों के "मेनू" का हिस्सा बन जाएंगे,यानि उनका अस्तित्व दांव पर लग जाएगा। राजनीति में आने से पहले एक दिग्गज बैंकर रहे मार्क कार्नी ने साफ कहा कि अमेरिका के नेतृत्व वाली पुरानी "नियम-आधारित व्यवस्था" अब इतिहास बन चुकी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब हम बदलाव के दौर में नहीं, बल्कि एक गहरी 'दरार' के दौर में हैं। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिए बिना यह साफ कहा कि दुनिया अब ट्रंप-पूर्व (Canada vs Trump 51st state) सामान्य स्थिति में कभी नहीं लौटेगी। शक्तिशाली देश अब आर्थिक एकीकरण को एक हथियार (Coercion) के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे मध्यम दर्जे के देशों के लिए सुरक्षा के मायने बदल गए हैं।

भारत के लिए क्या हैं इसके मायने ? (The India Connection)

मार्क कार्नी की यह चेतावनी भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत आज खुद को एक 'मध्यम शक्ति' से ऊपर उठाकर एक 'ग्लोबल प्लेयर' के रूप में स्थापित कर रहा है।

रणनीतिक स्वायत्तता

कार्नी का "मेज़ पर रहने" का सिद्धांत भारत की उस विदेश नीति से मेल खाता है जहाँ भारत किसी एक गुट का हिस्सा बनने के बजाय अपनी शर्तों पर वैश्विक मंचों (G20, BRICS, QUAD) पर नेतृत्व कर रहा है।

आर्थिक दबाव का इस्तेमाल करेंगे

कार्नी ने चेतावनी दी कि शक्तिशाली देश व्यापार को दबाव के लिए इस्तेमाल करेंगे। भारत को आत्मनिर्भर भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करना होगा ताकि वह किसी महाशक्ति के 'मेनू' पर न आए।

ग्रीनलैंड और संप्रभुता का मुद्दा

कार्नी ने खुलकर ग्रीनलैंड और डेनमार्क का समर्थन किया, जिस पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने नियंत्रण की मंशा जताई थी। कार्नी का यह बयान दुनिया भर के उन देशों के लिए एक मिसाल है जो अपनी क्षेत्रीय अखंडता को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने साफ किया कि केवल नियमों का पालन करने से सुरक्षा नहीं मिलेगी, बल्कि सक्रिय प्रतिरोध और आपसी एकजुटता जरूरी है।

कनाडा का 'विद्रोही मॉडल'

रिपोर्ट्स के अनुसार, कनाडा ने किसी भी संभावित बाहरी हस्तक्षेप या आक्रमण से निपटने के लिए एक 'विद्रोही मॉडल' (Insurgency-style strategy) पर विचार करना शुरू कर दिया है। यह इस बात का संकेत है कि विकसित देश भी अब अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर कितने गंभीर और चिंतित हैं।

भविष्य की कूटनीति "शक्ति और यथार्थवाद" पर आधारित

मार्क कार्नी का भाषण इस बात की पुष्टि करता है कि भविष्य की कूटनीति "शक्ति और यथार्थवाद" पर आधारित होगी, पुराने लिखित सिद्धांतों पर नहीं होगी। उनका यह कहना कि "कमजोरों को अपनी मजबूरी के अनुसार कष्ट सहना पड़ता है," एक कड़वा सच है। भारत जैसे देशों के लिए यह संदेश साफ है: अपनी सैन्य और आर्थिक ताकत इतनी बढ़ाएं कि मेज़ पर आपकी कुर्सी स्थायी रहे।

भारत-कनाडा संबंध पर असर

क्या कार्नी के इस नए कूटनीतिक रुख से भारत और कनाडा के तनावपूर्ण रिश्तों में जमी बर्फ पिघलेगी? क्या दोनों देश 'मध्यम शक्तियों' के रूप में एक साझा मंच पर आ पाएंगे?

डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया

कार्नी के इस कड़े रुख पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अगली सोशल मीडिया पोस्ट या आधिकारिक प्रतिक्रिया क्या होगी, इस पर पूरी दुनिया की नजर है।

रूस और चीन वैश्विक संतुलन बिगाड़ने के रूप में देख सकते हैं

एक अहम पहलू वेनेजुएला और कनाडा का है। ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए नक्शे में इन दोनों देशों को अमेरिकी झंडे से ढका दिखाना केवल एक चुनावी स्टंट है या किसी बड़े भू-राजनीतिक बदलाव की आहट? यदि अमेरिका अपने पड़ोसियों के प्रति आक्रामक होता है, तो रूस और चीन जैसे देश इसे वैश्विक संतुलन बिगाड़ने के अवसर के रूप में देख सकते हैं।