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साकेतधाम में हैं प्राकृतिक त्रिपुंडधारी रामेश्वरम महादेव, सावन में हर दिन अभिषेक

शिवभक्त संस्कारधानी के ऐतिहासिक शिवालयों की महिमा निराली है। लेकिन नए शिवालय भी शिवभक्तों की आस्था का केंद्र बनते जा रहे हैं। मां नर्मदा के पावन तट गौरीघाट स्थित साकेतधाम आश्रम में विराजमान रामेश्वरम महादेव भी भोलेनाथ का ऐसा ही मन्दिर है। महज 20 वर्ष पूर्व विराजित प्राकृतिक त्रिपुंड युक्त रामेश्वरम महादेव के प्रति शिवभक्तों की आस्था दिनों दिन बढ़ती जा रही है। सावन मास में यहां विशेष रूप से शिवजी का पूजन किया जाता है।

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रामेश्वरम महादेव, गौरीघाट स्थित साकेतधा

रामेश्वरम महादेव, गौरीघाट स्थित साकेतधा

नर्मदा तट गौरीघाट पर है मनोहारी शिवालय, विदेशों से भी आते हैं भक्त
जबलपुर।
शिवभक्त संस्कारधानी के ऐतिहासिक शिवालयों की महिमा निराली है। लेकिन नए शिवालय भी शिवभक्तों की आस्था का केंद्र बनते जा रहे हैं। मां नर्मदा के पावन तट गौरीघाट स्थित साकेतधाम आश्रम में विराजमान रामेश्वरम महादेव भी भोलेनाथ का ऐसा ही मन्दिर है। महज 20 वर्ष पूर्व विराजित प्राकृतिक त्रिपुंड युक्त रामेश्वरम महादेव के प्रति शिवभक्तों की आस्था दिनों दिन बढ़ती जा रही है। सावन मास में यहां विशेष रूप से शिवजी का पूजन किया जाता है। मंदिर से नर्मदा का सौंदर्य भी देखने लायक होता है। गर्मी की सुहानी शाम का नजारा हो, ठंड में कोहरे की चादर या फिर बारिश की झड़ी , यहां शिव आराधना लोगों को सुकून देती है। यहां सालभर धार्मिक अनुष्ठान होते हैं, लेकिन सावन में यहां भक्त बड़ी संख्या में शिव जी का अभिषेक कर रहे हैं। विदेशों से भी शिवभक्त विशेष तौर पर पहुंच रहे हैं।


पहले बनना था राम मंदिर-

साकेतधाम पीठाधीश्वर स्वामी गिरीशानन्द सरस्वती ने बताया कि यहां पहले राम मंदिर बनना तय हुआ था। इसकी तैयारियां भी हो गई और प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया गया था। लेकिन इसके पहले ही उन्हें स्वप्न में यहां शिवालय बनाने का आदेश मिला। इसके बाद स्वामी गिरीशानंद सरस्वती के स्वप्नानुसार भगवान शिव का मंदिर बनाकर रामेश्वरम महादेव की स्थापना हुई । इसके बाद से यहां निरंतर भोले का अभिषेक के साथ सावन महीने में प्रतिदिन विशेष श्रंगार किया जाता है। यहां 11 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा प्रतिदिन पूजन किया जाता है।

ओंकारेश्वर से लाए थे शिवलिंग-
स्वामी गिरीशानन्द सरस्वती ने बताया कि यह अनगढ़ प्राकृतिक शिवलिंग ओंकारेश्वर में मां नर्मदा की गोद से लाया गया था। इसकी प्राण प्रतिष्ठा 20 वर्ष पूर्व की गई थी। जहां मंदिर है वहां पर पूर्व में सिद्ध संत तपस्या किया करते थे। इसीलिए इस स्थान पर शिवलिंग की स्थापना की गई। उन्होंने बताया कि भगवान रामेश्वरम महादेव का पूजन करने शहर से बाहर के भी भक्त विशेष तौर पर आते हैं। पूजन के बाद मानसिक शांति प्राप्त होती है।

जिलहरी पर बने हैं कई सर्प-
पुजारी रोहित दुबे ने बताया कि नर्मदा के तट पर स्थित साकेत धाम में श्री रामेश्वर महादेव की अद्भुत छटा एवं कृपा सदैव भक्तों पर बनी रहती है । साकेत वासी स्वामी अखंडानंद के कृपा पात्र शिष्य स्वामी गिरिशानंद सरस्वती के द्वारा स्थापित यह शिवलिंग अपने आप में अद्वितीय है । शिवलिंग पर प्राकृतिक रूप से त्रिपुंड बना हुआ है । जिलहरी में सर्प की कई आकृतियां स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि स्वामी कल्याण दास एवं अनेक संतों को इस स्थान पर भगवान शिव की ऊर्जा की अनुभूति हुई है। श्रावण मास के पवित्र अवसर पर एकादश वैदिक ब्राह्मण के द्वारा श्रावण माह मेंलगातार रुद्राभिषेक चल रहा है । इसका समापन रक्षाबंधन पर होगा। पूरे श्रावण मास भर प्रतिदिन भगवान शिव की मनोहारी झांकियां प्रस्तुत की जाती है । श्री रामेश्वर महादेव के सामने ही आदि शंकराचार्य की मूर्ति का स्थापन भी किया गया है ,जो अद्भुत है।