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कभी कोचिंग का मुंह नहीं देखा, सेल्फ स्टडी से हुआ नीट में सिलेक्शन

कभी कोचिंग का मुंह नहीं देखा, सेल्फ स्टडी से हुआ नीट में सिलेक्शन

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NEET exam

NEET exam

जबलपुर। नीट जैसा राष्ट्रीय स्तर का एग्जाम पास करना डॉक्टर बनने का सपना देख रहे हर स्टूडेंट का होता है। लेकिन इसमें सफलता गिनती के लोगों को ही मिल पाती है। जिन्हें सफलता मिलती है, वे अपने पेरेंट्स और कड़ी मेहनत को इसका श्रेय देते हैं। अधिकतर स्टूडेंट्स नीट क्लीयर करने के लिए महंगी कोचिंग पढकऱ एग्जाम देने जाते हैं, वहीं दूसरी ओर शहर के ऐसे भी स्टूडेंट्स हैं, जिन्होंने सेल्फ स्टडी से नीट क्लीयर कर बता दिया कि खुद पर विश्वास हो तो लाखों रुपए की महंगी कोचिंग के बिना भी एग्जाम पास किया जा सकता है।

कभी नहीं गया कोचिंग, घर पर की पढ़ाई
विशेष अग्रवाल ने नीट 2022 में 682/720 अंक अर्जित कर 637 ऑल इंडिया रैकिंग प्राप्त की है। इसके बाद अब उनका ऐम्स में पढऩे का सपना पूरा हो गया। उन्होंने सेल्फ स्टडी और अथक परिश्रम से पहले अटेम्प्ट में ही नीट क्लियर कर लिया है। विशेष अग्रवाल ने बताया कि मैंने नीट के लिए सेल्फ स्टडी की है, इंटरनेट पर लोडेड लेक्टचर वीडियो ऑनलाइन देखकर पढ़ता और समझता था। इसके अलावा भी कोई डाउट यदि रह जाते तो इंदौर टीचर निखार वैद्य और भावना पाल मैडम को मोबाइल पर भेज देता था, वे ऑनलाइन ही मुझे समझा देते थे। इसी की बदौलत मैंने पहले ही अटेम्पट में नीट क्लीयर किया है।

नहीं देखता टीवी, मम्मी पापा से ली हेल्प

9 क्लास से ही बहुत कम टीवी देखता हूं, महीने दो महीने में कभी बोरियत दूर करने के लिए मूवी देखता हूं, बाकी समय केवल अपनी पढ़ाई करता हूं। रोज 1 घंटे मोबाइल चलाता था, जिसमें एजुकेशनल वीडियो देखना व गेम्स आदि खेलता था। पापा विकेश अग्रवाल पीडियट्रिक सर्जन, मां रेखा अग्रवाल रेडियो डायग्नोसिस हैं। पापा टाइम टेबिल बनाने के साथ पढऩे का तरीका बताते थे। मेरी कमजोरियों को मजबूती बनाने में सहयोग किया। वहीं मम्मी रिवीजन के साथ बायोलॉजी के डाउट को क्लीयर कराने में हेल्प करती थीं।

कोचिंग की जरूरत ही नहीं
मैंने स्कूल टाइम से लेकर आज तक कोई कोचिंग नहीं की। मुझे खुद पर विश्वास रहता है, कि मैं कर सकता हूं। यदि ये बात हर कोई समझ जाए तो बेवजह का लाखों रुपए का खर्चा बच सकता है।

सेल्फ मोटिवेशन से पूरा हुआ सपना
सेल्फ मोटिवेशन और फैमिली सपोर्ट ने हमें डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने में हेल्प की है। हम अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी होंगे जो डॉक्टर बनेंगे। ये हमारे लिए गौरव की बात है। ये कहना है संस्कार और वसुंधरा साहू का। दोनों डॉ. दीपक साहू के बेटे बेटी हैं। वसुंधरा और संस्कार ने बताया कि कोविड काल के दौरान जब लोगों के इलाज में डॉक्टरों की कमी पड़ी तब यह निश्चय कर लिया कि हम भी डॉक्टर ही बनेंगे। लॉकडाउन का हमने पूरा फायदा उठाया और गांव जाकर एकांत में रहकर सेल्फ स्टडी की। बुआ गायनकोलॉजिस्ट डॉ. भारती साहू ने हमें पढ़ाने में बहुत हेल्प की। पापा ने हर दिन मोटिवेट किया। हम दोनों ने 75 प्रतिशत सेल्फ स्टडी और गाइडेंस के लिए 25 प्रतिशत कोचिंग का सहारा लिया है।

दादा थे डॉक्टर, हम तीसरी पीढ़ी
वसुंधरा, संस्कार ने बताया कि उनके दादा हरिशंकर साहू बीएएमएस डॉक्टर थे। उनकी तीन बुआ, चाचा, पापा समेत एक दीदी भी डॉक्टर है। वे अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी के डॉक्टर बनेंगे।

खुशी का नहीं रहा ठिकाना, मुंह मीठा कराया
जिन स्टूडेंट्स का नीट क्लियर हुआ है, उन्हें बधाई देने वालों की लाइन लगी रही। घर से लेकर फ्रेंड्स तक मुंह मीठा कराने पहुंचते रहे। आयुष मौर्या, मोहित पटेल, अशिता द्विवेदी, मोहित रौतिया, अनुराग खरे का कहना था कि इस बार बहुत कठिन पेपर आए थे, जिन्हें आसानी से साल्व करना मुश्किल था, लेकिन हमने हर चेप्टर के सवालों को कई कई बार रिवीजन के साथ सॉल्व किया था, जिससे हमने नीट क्लियर किया। भव्यजोत सिंह जग्गी, राधिका गुप्ता, यश अग्रवाल, आकांक्षा साहू, एकता कुर्मी, प्राची झरिया, वरुण कुमार, ललित चौधरी को बधाई देने लोग उनके घर पहुंचे।