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जबलपुर। नर्सिंग एक एेसा प्रोफेशन जो नाम से ही सेवाभाव से जुड़ा हुआ है। इस प्रोफेशन में कोई मरीज किसी भी नर्स के लिए बड़ा या छोटा नहीं होता, क्योंकि हर नर्स को मरीजों की पीड़ा और घाव एक समान नजर आते हैं। मानवता के लिए खुद के जीवन में समर्पित करने वाली इन नर्स को रोजाना न जाने कितनी जिन्दगियों की जंग के उतार-चढ़ाव से रूबरू होना पड़ता है। कभी इन्हें जिन्दगी को बचा कर खुशी मिलती है, तो कभी न उम्मीद होने के बाद भी जिन्दगी को जिताने की जंग यह लड़ती रहती हैं। इस इंटरनेशनल नर्स डे के मौके पर आइए जानते हैं नर्सेज के एेसे जीवन से जुड़ी कुछ बातें।
इंटरनेशनल नर्सेस डे- सेवा और मानवता के लिए होती है महत्वपूर्ण भूमिका, जिंदगी की जंग लड़ते लोगों को जिताने में दांव लगाने का कर्तव्य
हड़ताल के बीच जन्मा 700 ग्राम का बच्चा
९ सालों से नर्सिंग के क्षेत्र से जुडी सिस्टर लवली हैरिसन ने बताया कि एक बार हॉस्पिटल में हड़ताल के कारण सभी व्यवस्थाएं ठप्प हो चुकी हैं। ४२ दिनों की हड़ताल में किसी भी मरीज का अस्पताल आना किसी चुनौती से कम नहीं होता था। इस बीच नर्गिस का बेबी आया, जो प्रीमिच्योर था। डिलीवरी के दौरान उसका वजन महज ७०० ग्राम था। कम संसाधनों में भी उसे बचाया। उसकी स्थिति एेसी थी कि उसे दो महीने तक एडमिट रखना पड़ा।
एक जिस्म में दो जान को बचाया
१७ सालों से सिस्टर प्रतिभा सिंह नर्सिंग के प्रोफेशन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि नर्सिंग का काम जितना चुनौतीपूर्ण हैं, उतना ही खुद को संतुष्ठि देने वाला है। वे बताती हैं कि तीन मुख्य एेसे क्रिटिकल केस सुलझाए हैं कि जिसमें मां को ब्लड प्रेशर बढऩे की स्थिति में बचाना मुश्किल था। इस स्थिति में एक जिस्म में बसी दो जानों को एक साथ बचाने के लिए काफी मेहनत कि जिसका परिणाम उनकी सहूलियत के रूप में मिला।
39 साल में देखे जीवन में कई उतार-चढ़ाव
सिस्टर एमएफ स्वामी वे जिन्दगी की एक उम्र को इस प्रोफेशन में लगा दिया है। उन्होंने बताया कि नर्सिंग के प्रोफेशन को जॉइन करते समय उन्होंने एक निश्चय लिया था, वे बाकी लोगों से अलग हैं क्योंकि भगवान ने नर्सों को सेवा के कार्य के लिए चुना है। एेसे में हर केस को सॉल्व करने के पहले वे भगवान से प्रेयर करना नहीं भूलती। उन्होंने बताया कि १९९७ में आए भूकंप में लगातार लाशों और मरीजों को देखकर उन्होंने असल सेवा कार्य किया था।
सेवाकार्य के लिए ही बने हैं हम
नर्स प्रियंका चौरसिया, प्रीति सिंह, मनीषा सोनी और ममता ठाकुर का कहना है कि नर्सिंग के क्षेत्र से जुडऩे वाले इन लोगों का कहना है नर्सिंग का क्षेत्र अपनाना सभी के बस की बात नहीं है। मरीज को हर कदम पर कभी दम तोड़ते तो कभी जीवन मिलते देखना पड़ता है। नर्सिंग का प्रोफेशन हमे सेवाकार्य करने के लिए हमेशा प्रेरित करता है।
इसलिए मनाते हैं दिवस
१२ मई को सिस्टर फ्लोरेंस नाइटेंगल की याद में इस दिवस को मनाया जाता है। १९६५ में इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्स द्वारा इस दिवस को इंटरनेशनल लेवल पर मनाने के लिए चुना गया। नर्सेज डे की इस साल की थीम है नर्स- अ वॉइस टू लीड- हैल्थ इज अ ह्यूमन राइट्स। दिवस के चलते शहर के विभिन्न नर्सिंग संस्थानों में विविध कार्यक्रमों का आयोजन भी होगा।
Published on:
12 May 2018 10:24 am
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