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newborn baby bone skin break – नवजात बच्चे की दाई से करवाई मालिश, फट गई चमड़ी- टूट गई हड्डियां- जरूर पढ़ें ये खबर

शिशु सुरक्षा दिवस पर विशेष.... गलत मालिश के कारण खतरे में पड़ रही नवजात की जान, मेडिकल कॉलेज में हर माह ६-७ बच्चों को ही रही सर्जरी

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newborn baby bone skin break after babysitter massage

newborn baby bone skin break after babysitter massage

जबलपुर। पुराने समय से चली आ रही परंपराएं कभी कभी जानलेवा भी साबित हो जाती है। इन्हें समय रहते बदल लेना चाहिए। कुछ ऐसा ही मामला इन दिनों नवजातों की मालिश के दौरान देखा जा रहा है। जिनमें दाई व नाइन द्वारा मालिश करवाने के बाद बच्चे की चमड़ी फट गई और हड्डी भी टूटने का मामला सामने आया है। यही नहीं उनके हाथ पैर की बनावट में भी मालिश के बाद फर्क देखा गया। विशेषज्ञों का कहना है कि मालिश के गलत तरीके से नवजात शिशुओं की जान खतरे में पड़ रही है। मालिश की वजह से तबीयत बिगडऩे पर बच्चों को जबलपुर रेफर किया जा रहा है। नेताजी सुभाषचन्द्र बोस मेडिकल कॉलेज में प्रतिमाह इस प्रकार ६-७ बच्चों की सर्जरी की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की मालिश ज्यादा प्रचलन में है। इस कारण बच्चों पीठ पर रगडऩे से लालीपन, सूजन, हाथ-पैर का फ्रैक्चर जैसी दिक्कत आम बात हैं। मेडिकल कॉलेज में महाकोशल क्षेत्र के केस रेफर होकर आ रहे हैं।

प्रो डॉ विकेश अग्रवाल पीडियाट्रिक सर्जन मेडिकल अस्पताल की सलाह है कि इस माह कुछ ज्यादा ही नवजात के दाई/खवासन/नाउन द्वारा की गयी मसाज के मामले सामने आये जैसे पीठ में रगड़ने से फोड़ा,चमड़ी फस जाना, हाथ का फ्रैक्चर आदि।

कुछ महत्पूर्ण तथ्य
1. डॉक्टरी सलाह है की नवजात बच्चे की मसाज माँ द्वारा नरमी से ही की जानी चाहिए।
2. हार्ड मसाज करने से बच्चा मजबूत नहीं होता बल्कि उसको कई प्रकार के नुक्सान हो सकते हैं। नीचे की पिक्चर बयां कर रही हैं।
3. मसाज के समय अगर बच्चा एन्जॉय नहीं कर रहा और अत्यधिक रोता है मतलब उसकी ज्यादा कठोर मसाज हो रही है। वो सही नहीं है।
4. मसाज करते वक़्त नवजात की स्किन ज्यादा लाल नहीं होनी चाहिए और पर्याप्त तेल का प्रयोग करना चाहिए।
5. मसाज करते वक़्त हाथ और पैर को क्रॉस करना या खीचना फ्रैक्चर या जॉइंट डिस्लोकेशन कर देता है।
6. अगर दिन में दो बार मसाज की जाये तो दोनों बार बच्चे को साबुन और गरम सहनीय पानी से नहला चाहिए जिससे की स्किन के पोर्स खुले रहें और स्किन इन्फेक्शन न हो। धीरे धीरे जैसे दाई का डिलीवरी में रोल खत्म हो गया और मातृत्व सुरक्षित हो गया उसी तरह दाई का मसाज में भी रोल ख़त्म करना चाहिए। सतर्क रहें। माँ या पिता ही नवजात की मसाज करें। लगाव भी बढ़ेगा और सुरक्षित भी रहेगा।

केस से समझें हकीकत-
०१- मोह से आए ४० दिन के शिशु में टांगों को क्रास खींचने के कारण पेट की मांसपेशी में जख्म और मवाद बन गया। उसकी सर्जरी की गई।
०२- डिंडोरी से ढाई माह के शिशु में मसाज के दौरान खींचने के कारण हाथ में फ्रैक्चर हो गया है। उसके हाथ पर प्लास्टर चढ़ा गया है।


गलत तरीके से मसाज के कारण नवजातों की जान खतरे में पड़ रही है। प्रतिमाह इस तरह के ६-७ बच्चों की सर्जरी की जा रही है। लोगों को जागरूक होने की आवश्यकता है। सही तरीके से किया गया मसाज फायदेमंद है।
डॉ. विकेश अग्रवाल, प्रोफेसर, शिशु शल्य चिकित्सा विभाग