
family dispute counselling
लाली कोष्टा@जबलपुर। कहते हैं यदि सोच लिया जाए तो पत्थर में भी पानी निकाला जा सकता है। वहीं समाजसेवा में केवल दान पुण्य या आर्थिक मदद ही काफी नहीं होती है, बल्कि समाज में बिखरते परिवारों, टूटते रिश्तों और विश्वास को कायम रखने में भी अहम योगदान दिया जा सकता है। कुछ ऐसा ही काम जबलपुर की प्रयास जन सशक्तिकलरण संस्थान कर रहा है। जो न केवल जरूरतमंद गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करती हैं, बल्कि टूटते परिवारों की कडिय़ों को पुन: जोडऩे का काम कर रही है।
4 महिलाओं की अच्छी सोच से बना ‘प्रयास’
प्रयास जन सशक्तिकरण संस्थान की राष्ट्रीय अध्यक्ष रानू शर्मा ने बताया कि मानव सेवा करने के उद्देश्य से साल 1998 में मेरे साथ श्यामा सिन्हा, प्रभा रजक, मनीषा भारती ने शिक्षा सेवा की शुरुआत की। जिसमें सबसे पहले हमारे घरों के आसपास की गरीब बस्तियों के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देना शुरू किया। जो आज तक निरंतर जारी है, उनका पूरा खर्च हम सब मिलकर वहन करते रहे। पिछले साल 2021 में हमारे साथियों ने इस संगठन को नाम देने का विचार किया और हमने ‘प्रयास जन सशक्तिकरण संस्थान’ की स्थापना की। इसमें करीब 350 से ज्यादा महिला एवं पुरुष समाजसेवी सक्रिय सदस्यों के रूप में शामिल हैं।
बनाई खुद की लीगल सेल, जोड़ रहे टूटते परिवार
संस्थान की सक्रिय सदस्य व समाजसेवी एड. सुनंदा केशरवानी ने बताया कि अधिकतर समाजसेवी संगठन एक जैसे ही काम करते चले आ रहे थे, तो हमने खुद का लीगल सेल बनाया। जिसमें संस्थान के सदस्य वकील मिलकर टूटते परिवारों को जोडऩे का नि:शुल्क काम करते हैं। परामर्श के साथ ही कानूनी कार्यवाही में भी हमारी संस्था के लोग सहयोग देते हैं। हमने महज एक साल में ही बीस से ज्यादा परिवारों को टूटने से बचा लिया है। इसके अलावा प्रयास संस्थान घरेलू हिंसा व समाज और परिस्थितियों से पीडि़त महिलाओं को खोजकर उन्हें न्याय दिलाने व उनकी समस्याओं का समाधान भी करती है। इस कार्य में एड. रवि सिन्हां, एड. राजेश सेन, एड.शहरयार, एड. रोहित ठाकुर, सुमित कनौजिया विशेष सहयोग व समय देते हैं। लीगल सेल के माध्यम से हमारा उद्देश्य हर हाल में परिवारों को खुशहाल बनाना है, टूटने से बचाना है।
ये काम कर रहा लीगल सेल
- पीडि़त परिवारों की पीड़ा और समस्याओं का पूर्ण हल निकाला गया व उन्हें राहत दी गई।
- परेशान व किन्हीं कारणों से दुखी महिलाओं को उत्पीडऩ से बाहर कर उन्हें पुनर्वास केंद्र भेजा गया। उनकी मानसिक स्थिति में सुधार कर काउंसलिंग की गई।
- दूसरे शहरों व राज्यों से आई बच्चियों को ‘प्रयास संरक्षण गृह’ में निशुल्क व्यवस्थाओं के साथ संरक्षण दिया गया।
- विकलांगों को उनके अधिकार दिलाए, पर्याप्त संसाधनों की आपूर्ति की गई। भूखे वा निराश्रित असहाय व्यक्तियों की सेवा सतत की जा रही है।
- कोरोना काल में सघन बस्तियों में पर्याप्त भोजन की व्यवस्था की गई। मास्क व दवाइयों का नि:शुल्क वितरण किया गया।
- इसी कड़ी में प्रयास संस्थान भूखे व निराश्रित असहाय व्यक्तियों की सेवा निरंतर कर रहा है।
Published on:
21 Mar 2022 10:51 am
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