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खाने योग्य बर्फ बनाने की शहर में एक भी फैक्ट्री नहीं 

शहर में खाने योग्य बर्फ बनाने की एक भी फैक्ट्री नहीं है,वे यह कहकर बर्फ बेच रही हैं कि बर्फ खाने योग्य नहीं है।

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Abha Sen

May 29, 2015

shor

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खाने योग्य बर्फ बनाने की शहर में एक भी फैक्ट्री नहीं
जबलपुर। शहर में खाने योग्य बर्फ बनाने की एक भी फैक्ट्री नहीं है। जो हैं, वे यह कहकर बर्फ बेच रही हैं कि बर्फ खाने योग्य नहीं है। इसे मांस, शव सहित अन्य पैकेटबंद सामग्री को ठंडा रखने में उपयोग किया जा सकता है। इसके बावजूद बर्फ के गोले, लस्सी, मैंगो शेक, जलजीरा, गन्ने के रस सहित अन्य पदार्थो में बर्फ मिलाई जा रही है। यह बर्फ शरीर को बीमारी का घर बना रही है। जानकारों का कहना है कि अखाद्य बर्फ का सेवन धीमे जहर की तरह है। नियमित सेवन से यह बर्फ धीरे-धीरे शरीर को डैमेज करती है। इसका असर सबसे ज्यादा लिवर पर पड़ता है।
बर्फ निर्माण की प्रक्रिया देख लें, तो बर्फ गले के नीचे नहीं उतरेगी। बर्फ जिस कंटेनर में बनाई जाती है, वह जंग लगा होता है। पानी भी गंदा होता है। नियमानुसार जिस पानी से बर्फ बनाई जाती है, वह सेवन योग्य है या नहीं, इसकी प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से जांच करानी चाहिए। ताकि, पता चले कि पानी में ई-कोलाई वैक्टीरिया, सल्फर और आर्गेनिक खाद्य पदार्थ तो नहीं हैं, लेकिन कोई भी फैक्ट्री इन नियमों का पालन नहीं कर रही है। जानकारी के अनुसार बर्फ फैक्ट्री खुद के प्रोडक्ट को अखाद्य बताकर विक्रय करती है, इसके बाद भी खाद्य सुरक्षा एवं मानक निर्धारण अधिनियम के तहत लाइसेंस फैक्ट्री संचालकों ने लिया है और खाने के लिए बर्फ का विक्रय करते हैं।
अखाद्य बर्फ का प्रयोग खाने के रूप में नहीं किया जा सकता। फैक्ट्री वालों को निर्देश दिए गए हैं और बाहर नोटिस भी लगवाया गया है। टीम बनाकर एेसे कारोबारियों और फैक्ट्री के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जो अखाद्य बर्फ को खाद्य पदार्थ के रूप में बेच रहे हैं।
डॉ. बीएस चौहान, सीएमएचओ
बर्फ साफ पानी से तैयार होनी चाहिए। इसके पानी की जांच की जानी चाहिए। जिस सांचे में बर्फ बनाई जा रही है, उसमें जंग नहीं होना चाहिए।
डॉ. गिरीश बाजपेयी, फिजीशियन, विक्टोरिया जिला अस्पताल

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