
drone
जबलपुर। शहर के युवाओं का ड्रोन की मदद से खेत में दवा के छिड़काव का प्रयोग नई पहचान बना रहा है। देश का सबसे बड़ा जबलपुर में निर्मित स्वचलित ड्रोन अगले माह 60 लीटर क्षमता के साथ उड़ान भरेगा। यानी एक बार की उड़ान में तीन एकड़ के खेत में दवा का छिड़काव करेगा। अभी ड्रोन की क्षमता 30 लीटर है।
ड्रोन की दो बैट्री 50 मिनट में एक साथ चार्ज होती है। इन्क्यूबेशन सेंटर में रजिस्टर्ड ड्रोन कंपनी के प्रमुख सदस्य अभिनव सिंह ठाकुर ने बताया, स्वचलित ड्रोन प्रदेश में पंचायतस्तर पर उपलब्ध होगा। ड्रोन सेटअप से गांवों में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बनेंगे।
उन्होंने 23 हजार स्वचलित ड्रोन बनाने का लक्ष्य रखा है। इस स्टार्टअप में निवेश के लिए नार्वे के निवेशक आगे आए हैं। अभिनव का कहना है कि बड़े निवेशक साथ आते हैं तो बड़े स्तर पर एक साथ ड्रोन का निर्माण करना करेंगे। ऐसा नहीं हुआ तो एक बार में 1000 ड्रोन बनाएंगे। अभी ड्रोन बनाने की लागत 4.50 लाख के करीब है। एक घंटे में स्वचलित ड्रोन 15 से 20 एकड़ तक के खेत में दवा का छिड़काव करता है।
2019 में बनाया पहला ड्रोन
जबलपुर इनक्यूबेशन सेंटर में रजिस्टर्ड स्टार्टअप ओआरसी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 2019 में पहला ड्रोन बनाया था। इस स्टार्टअप की शुरुआत 2014 में हुई। संस्थापक अभिनव सिंह ठाकुर और अनुराग चांदना और उनकी टीम अपने प्रोजेक्ट पर लगातार काम कर रही थी। वे कृषि और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हाई-टेक उत्पाद का निर्माण कर रहे हैं।
किसानों को खेत में नहीं जाना पड़ेगा
ड्रोन से दवा के छिड़काव से किसानों को खेतों में नहीं जाना पड़ता है। जिससे फसलों को नुकसान नहीं पहुंचता और किसान भी दवाओं से होने वाले दुष्प्रभाव से बचता है। ड्रोन से होने वाले छिड़काव में दवा का भी कम इस्तेमाल होता है। कम समय पूरे खेत में एक समान छिड़काव होता है। गन्ना, मक्का, अरहर जैसी ऊंची फसल व धान के खेत जहां पानी भरा होता है, वहां ड्रोन से दवा का छिड़काव उपयोगी है।
Published on:
15 Dec 2022 06:15 pm
बड़ी खबरें
View Allजबलपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
