2 मई 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नर्मदा घाटों पर हजारों लोगों की जान जोखिम में, बिना फिटनेस और लाइफ जैकेट चल रहीं नावें

narmada river boating safety गौरीघाट, जिलहरीघाट, खारीघाट और तिलवाराघाट में नौकायन संचालन पूरी तरह अनियंत्रित ...> यहां पढ़ें विस्तार से

2 min read
Google source verification
narmada river boating safety negligence

जबलपुर में नर्मदा नदी के गौरी घाट का एक नजारा। फोटो-पत्रिका

narmada river boating safety: नर्मदा के विभिन्न घाटों पर संचालित नौकायन में गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। नावों की फिटनेस, नाविकों की जांच और यात्रियों की सुरक्षा के लिए लाइफ जैकेट जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। हालात यह हैं कि कई स्थानों पर नशे की हालत में भी नाव चलाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, रोजाना हजारों लोगों की जान जोखिम में डाली जा रही है।

सुरक्षा इंतजामों की भारी कमी

जबलपुर के गौरीघाट, जिलहरीघाट, खारीघाट और तिलवाराघाट में नौकायन संचालन पूरी तरह अनियंत्रित नजर आ रहा है। कहीं दो नावों को जोड़कर मोटर से चलाया जा रहा है, तो कहीं नावों में बेंच लगाकर क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाया जा रहा है। कई नावों में रेलिंग तक नहीं है और लाइफ जैकेट का उपयोग भी नहीं किया जा रहा है। इतना ही नहीं, भारी सामान और यहां तक कि बाइक तक नावों में लोड की जा रही है।

नाविकों की फिटनेस और प्रशिक्षण पर सवाल

नाव चलाने वालों की उम्र और क्षमता को लेकर भी कोई स्पष्ट नियम लागू नहीं है। 14-15 वर्ष के किशोरों से लेकर 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग भी नाव चला रहे हैं। नाविकों का कोई प्रशिक्षण या फिटनेस परीक्षण नहीं होता, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।

24 घंटे गोताखोर और फर्स्ट एड की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि घाटों पर 24 घंटे गोताखोरों की तैनाती और प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) की व्यवस्था अनिवार्य की जानी चाहिए। वर्तमान में अधिकांश तटों पर आपात स्थिति से निपटने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।

टेंडर प्रक्रिया लंबित, मनमानी जारी

गौरीघाट में पिछले दो वर्षों से नौकायन का टेंडर नहीं हुआ है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति 35-40 हजार रुपए खर्च कर नाव बनाकर संचालन शुरू कर देता है। यात्री क्षमता, समय, किराया और सुरक्षा मानकों को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि 14 जनवरी 2011 को यहां ओवरलोड नाव डूबने से सात लोगों की मौत हो चुकी है।

भेड़ाघाट में भी खतरा बरकरार

भेड़ाघाट में भी अधिक किराया कमाने के लिए नाविकों की ओर से नाव को खतरनाक क्षेत्रों में ले जाने के मामले सामने आते रहते हैं। सोशल मीडिया पर भी कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें पर्यटक बिना लाइफ जैकेट के नौकायन करते दिख रहे हैं। नशे में नाव संचालन की शिकायतें भी मिलती रही हैं।

निगरानी के निर्देश

गौरीघाट में नौकायन के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है और तब तक जोन की टीम को निगरानी और कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
अंजू सिंह, अपर आयुक्त, नगर निगम

पर्यटकों के लिए लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य किया गया है और नशे की हालत में नाव संचालन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। खराब मौसम में नौकायन पर भी रोक लगाने को कहा गया है।
चतुर सिंह, अध्यक्ष, भेड़ाघाट नगर परिषद